How to Prepare Detail Project Report For Spice Grinding Plant (अपने business के लिए detail project report कैसे बनाए- मशाला उद्योग के लिए)

Detail Project Report For Spice Grinding Plant

Proposal For :

Term Loan & Working Capital Assistance

Prepared By:- CMA.Radhe  Agrawal (Corporate Consultant & Project Finance Adviser)


उद्यमी सम्बन्धी विवरण:

नाम:             मेसर्स ………………………………………………

पता:              ………………………………………………………

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कार्यानुभव एवं योग्यता:  स्नातक में डिग्री लेने के पश्चात विगत 8-10 वर्षो से भी अधिक समय से भारतीय मशाला उद्योग में कार्य कर रहे है, जिसमे पिछले 5-7 वर्षो से NewZealand प्रबंधक पद पर कार्यरत है जिसके कारण उद्यमी को भारतीय बाज़ारों के साथ साथ विदेशो में प्रयोग किये जा रहे अत्याधुनिक तकनीको के साथ साथ विदेशी बाजारों में मशालो की गुणवत्ता, खपत और मांग सम्बन्धी भी अच्छी जानकारी है. सम्बंधित क्षेत्र में सफलता पूर्वक महत्वपूर्ण प्रबंधकीय पदों पर रहते हुवे ब्यापार चलाने का लम्बा अनुभव, बैंकिंग, मार्केटिंग और फाइनेंस के सम्बन्ध में अच्छी समझ हासिल करने के साथ साथ मशाला उद्योग में एक लम्बा अनुभव रहने के कारण सम्बंधित उद्योग के सभी तकनिकी और ब्यापारिक जानकारियों की एक अच्छी और विकसित समझ हासिल करने के पश्चात खुद के साथ साथ समाज के अन्य लोगो को भी अपने उद्यम के माध्यम से रोजगार देने और उनके जीवनशैली में सुधार लाने के लिए और साथ ही अच्छी क्वालिटी के उत्पादों से उद्यमिता के क्षेत्र में खुद को स्थापित करने के लिए Rajasthan Food Processing Industry Policy- 2015  के तहत अपना लघु Propritorship Manufacturing यूनिट कोटा, राजस्थान में स्थापित करके धीरे धीरे उसको विस्तृत करने का लक्ष्य है.

  1. लगाये जाने वाला उद्यम सम्बन्धी विवरण: 06 टन प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता मशाला मिल : प्रस्तावित उद्यम की क्षमता प्रतिदिन 06 टन मशालो को प्रोसेस करने की होगी, जिसमे मुख्य रूप से भारतीय रशोई में प्रयोग की जाने वाली सभी मशालो का प्रसंस्करण किया जाएगा I भारतीय पारंपरिक खाद्य वस्तुवो में मशालो का प्रयोग विशेष महत्व रखता है एवं प्रत्येक घर में इसका प्रयोग किया जाने के कारण प्रस्तावित उद्यम की मांग बाज़ार में हमेशा उच्च स्तर पर रहती है, जबकि प्रस्तावित उद्यम में घरेलु बाजारों के साथ साथ विदेशो में भी निर्यात को प्राथमिकता दी जायेगी जिसकी वजह से उद्यमी को भारत सरकार के द्वारा EXIM Policy में दिया जाने वाला आर्थिक एवं कर सम्बंधित लाभों का भी फायदा मिलेगा. इस तरह से इसकी मांग अत्यधिक है, जबकि अपेक्षाकृत प्रसंस्करण की सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित उद्यम को स्थापित करने के लिए उद्यमी वर्गो को प्रेरित किया जा रहा है और Food Processing Industry Policy के अंतर्गत पूंजीगत विनियोग एवं उद्योग स्थापित करने को लिए जाने वाले ऋणों के ब्याज पर अनुदान के रूप में प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है. अतः प्रस्तावित उद्यम सामाजिक जरुरत के साथ साथ आर्थिक रूप से भी उद्यमी वर्ग के लिए काफी लाभदायक है.

प्रस्तावित उद्यम की विशेषता: आधुनिक तकनीक की मशीन का प्रयोग एवं उच्च गुणवत्ता वाले छोटे पैक को अपने रजिस्टर्ड ब्रांड के साथ बाज़ार में उतारकर अपने उद्यम को एक मजबूत आधार देना, जिससे उपभोक्ताओ से सीधे जुड़कर अपने ब्रांड नाम के प्रति उनमे विस्वाश स्थापित करके बाज़ार में अपने उत्पादों के मांग को हमेशा बनाए रखना I

  1. उद्यम स्थापित करने के लिए भूमि की आवश्यकता:

इस उद्यम को लगाने के लिए 10000-12000 Sq feet जमीन की आवश्यकता होगी, जहाँ पानी, बिजली की पर्याप्तता हो एवं मजदूरो की आपूर्ति आसानी से मिल सके और जो मुख्य मार्ग से जुड़ा हों, अतः कोटा, राजस्थान जो की पूरी तरज से राष्ट्रीय राज्य्मार्गो से जुड़ा हुवा है, जो की राजस्थान को दिल्ली, अहमदाबाद, वड़ोदरा, मुंबई, जबलपुर, भोपाल, आगरा, ग्वालियर, इंदौर, अमृतसर जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरो से जोडती है अतः इसके लिए जरुरी सभी साधनों की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुवे सर्वोत्तम जगह है जहाँ इसे स्थापित किया जा सकता है.

  1. अलग अलग कार्यो के लिए भूमि की आवश्यकता: प्रस्तावित उद्यम में भूमि का प्रयोग इस प्रकार से किया जाएगा:-
  • Factory shed :6000 Sq Ft
  • Godown/Store :2000 Sq Ft
  • Office :200  Sq ft
  • Guard room :100 Sq ft
  • Others : 700 Sq ft
  • Open space :3000 Sq ft
  • TOTAL :12000 Sq ft

आवश्यक भूमि एवं भवन को पट्टे पर लिया जाएगा जिसमे मशीनों की स्थापना एवं अन्य विशेष जरूरतों को देखते हुवे civil construction करवाया जाएगा.

  1. कच्चा माल: कच्चा माल के रूप में साबुत मशालो का प्रयोग किया जाएगा, जो की राजस्थान की विशेष पहचान है और भारतीय कृषि का मुख्य उत्पाद होने के कारण प्रचुर मात्रा में बाज़ार में उपलब्ध है, जिसे जयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा और भिवंडी से आवश्यकता के अनुसार ख़रीदा जा सकता है, चूँकि उद्यमी विगत 8-10 वर्षो से सम्बंधित क्षेत्र में Manufacturing के साथ साथ थोक व्यापार में कार्यरत है, उद्यमी को आवश्यक कच्चे माल के सम्बन्ध में उपलब्ध अलग अलग बाजारों का पूर्णतः जानकारी होने के साथ साथ इसकी गुणवत्ता एवं वास्तविक बाज़ार मूल्य का विशेष अनुभव है अतः कच्चे माल का 07 दिनों का स्टॉक रखकर उत्पादन प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के लगातार चलाया जा सकता है I
  2. तकनीकी वाणिज्यिक व्यवहार्यता : प्रस्तावित उद्यम में प्रयोग किया जाने वाला मशीन एवं manufacturing की प्रक्रिया वर्तमान में उपलब्ध नवीनतम तकनीक पर आधारित है, अतः प्रस्तावित उद्यम के लिए लगाई जाने वाली मशीनों का उद्योग में बिलकुल नवीन तकनीक का होने के कारण तकनीक परिवर्तन से आने वाला रिस्क न्यूनतम है एवं वाणिज्यिक दृष्टी से पूर्णतः व्यावहारिक है.

मशीन सप्लायर: प्रस्तावित उद्यम के लिए आवश्यक प्लांट एवं मशीन निर्माण का कार्य मुंबई और नॉएडा, जयपुर में मुख्य रूप से होता है जो की एक ही तरह के तकनीक पर आधारित मशीन का निर्माण करते है जिसमे semi automatic और fully automatic मशीन अलग अलग उत्पादन क्षमता आधारित मशीन शामिल है अतः उद्यमी अपनी आवश्यकता के अनुसार इन मशीन निर्माताओ के पास उपलब्ध मशीनों में से क्रय कर सकता है अथवा मशीन निर्माता उद्यमी की जरुरत के अनुकूल भी मशीनों का निर्माण करते है अर्थात सर्वोत्तम मशीनों के आपूर्तिकर्ता पर्याप्त मात्रा में होने के कारण प्लांट एवं मशीन की लागत भी अपेक्षाकृत एक सामान ही है.

  1. उत्पादन क्षमता: प्रस्तावित उद्योग के लिए लगाईं जाने वाली मशीन की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 8 घंटे के एक शिफ्ट में 06 टन कच्चे सामग्री को प्रोसेस करके तैयार माल में परिवर्तित करने की होगी, प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में पूर्ण क्षमता का क्रमशः 70% एवं 80% तत्पश्चात के वर्षो में 90% का उत्पादन होना अनुमानित है. इस तरह से वर्ष में 300 दिन कार्यदिवस मानते हुवे प्रथम, द्वितीय एवं बाद के वर्षो में क्रमशः 70%, 80% एवं 90% के अनुमान से 1260 टन, 1440 टन और उसके बाद 1620 टन माल तैयार होगा.
  2. प्रदुषण नियंत्रण: प्रस्तावित उद्यम एवं उद्योग में प्रयोग किया जाने वाला प्लांट एवं मशीनरी किसी भी तरह के प्रदुषण का उत्सर्जन नहीं करता है अतः ये उद्यम सरकार की प्रदुषण सम्बन्धी सभी मानको के अंतर्गत है, साथ ही प्रस्तावित उद्यम में waste goods की मात्रा शून्य होगा. प्रदुषण नियंत्रण नियमो के आधार पर राजस्थान प्रदुषण बोर्ड में प्रस्तावित उद्यम स्थापित करने हेतु आवेदन भी दिया जा चूका है.
  3. अपशिस्ट निबटान की व्यवस्था एवं प्रक्रिया: यद्यपि प्रस्तावित उद्यम अपशिस्ट शून्य है, तथापि अपशिष्ट निबटान व्यवस्था की आवश्यकता मूल रूप से नहीं है, परन्तु फिर भी waste मैनेजमेंट की उचित व्यवस्था नियमो और मानको के आधार पर किया जायेगा.
  4. निर्माण प्रक्रिया प्रवाह चार्ट: प्रस्तावित उत्पाद की निर्माण प्रक्रिया कुछ आसान से steps में पूरी हो जाती है जो इस प्रकार से है.

उत्पादन प्रक्रिया कच्चे मशालो को सफाई करने से शुरू होती है जिसमे मशालो में से कंकर, मिटटी या अन्य कचरों को अलग किया जाता है और साफ़ किये हुवे मशालो को आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ाया जाता है, जिसे मशीनों के द्वारा पाउडर बनाया जाता है, इसके बाद तैयार पाउडर को ठंडा किया जाता है और चलनी किया जाता है जिससे छिल्को की मात्र को अलग किया जा सके I पाउडर मशाला तैयार होने के बाद इसकी गुणवत्ता की जांच की जाती है एवं उच्च गुणवत्ता वाले मशालो को ही आगे की प्रक्रिया में भेजा जाता है,जिसके बाद ये पूरी तरह से Pakeging के लिए तैयार हो जाते है , तत्पश्चात अलग अलग quantity के bags में भरकर इन्हें स्टोर किया जाता है एवं खरीददार को भेज दिया जाता है.

निर्माण की प्रक्रिया सहज और आसान होने के कारण निर्माण कार्यो में अपेक्षाकृत रूकावटे कम आएगी और अधिकत्तम उत्पादन क्षमता को प्राप्त किया जा सकता है जो की प्रस्तावित उद्योग की सफलता सुनिश्चित करता है. इसमें प्रयोग किया जाने वाला मशीनों को सप्लायर के द्वारा फैक्ट्री में स्थापित किया जायेगा, मशीनों को फैक्ट्री में तय जगहों पर सामान्य प्रक्रिया से बहुत ही आसानी से स्थापित किया जा सकता है.

  1. अधारभूत साधनों की व्यवस्था :
  • बिजली का कनेक्शन 50 KW: प्रस्तावित उद्यम के लिए 50 KW बिजली के connected load के कनेक्शन की आवश्यकता होगी, जिसकी व्यवस्था राजस्थान राज्य बिजली बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा, साथ ही उत्पादन प्रक्रिया को बिना रुकावट चलाने के लिए 50kw डिजल जनरेटर भी लगाया जाएगा.
  • पानी की व्यवस्था 10000 Ltr/Day : उद्यम में अलग अलग कार्यो के लिए कूल मिलकर अनुमानित 10000 Ltr./Day पानी की आवश्यकता होगी, जिसकी व्यवस्था राज्य जल बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा साथ ही बोरिंग के माध्यम से भी पानी की व्यवस्था किया जाना नियोजित है.
  • मानव संसाधन की व्यवस्था : प्रस्तावित उद्यम के लिए प्रबंधक, कुशल, अर्ध-कुशल एवं अकुशल और गार्ड के लिए कुल मिलाकर 15 लोगो की आवश्यकता होगी जिसे लोकल area से वेतन आधारित भर्ती किया जायेगा.
  1. विपणन रणनीति: बाज़ार में प्रस्तावित उत्पाद की वर्तमान मांग और भविष्य की अनुमानित मांग अपेक्षाकृत अधिक है जिसकी पूर्ति सामान्यतः राजस्थान के उद्यमी वर्गो के द्वारा नहीं कर पाने के कारण अत्यधिक मात्रा में महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश से उत्तरप्रदेश में उच्च कीमत पर मंगाया जाता है, इस कारण प्रस्तावित उद्यम में होने वाला 100% उत्पादन बिलकुल आसानी से राजस्थान के अन्दर ही अग्रिम भुगतान एवं आर्डर बुकिंग के माध्यम से बिक्रय किया जा सकता है, अर्थात उत्पाद की मांग अधिक है और पूर्ति बेहद कम जिसके कारण कुल उत्पादन को आसानी से बेचा जा सकता है. एवं वर्तमान में प्रस्तावित उत्पाद की मांग अत्यधिक होने के कारन विपणन रणनीति की कोई आवश्यकता नहीं होने के बावजूद बाज़ार में अपनी मजबूत स्थिति को बनाए रखने और भविष्य में उत्पन्न होने वाले अनुमानित प्रतिस्पर्द्धा को देखते हुवे एक कुशल विपणन रणनीति बनाया जायेगा जिसमे मुख्या रूप से राजस्थान के प्रत्येक शहरो में डीलरशिप के माध्यम से एजेंट बनाकर अधारभूत तरीके से ब्यापार का बिस्तार किया जायेगा.
  2. SWOT विश्लेषण: उद्यमी के द्वारा आत्मनिर्भरता और तेजी से बदलते हुवे उद्यम अनुकूल परिवेश का लाभ लेने और स्वयं के साथ साथ समाज के लोगो को रोजगार और अच्छी जिंदगी देना प्राथमिक लक्ष्य है, ऐसे में अपने अन्दर के ब्याक्तिगत गुण, कौशल क्षमता और अपने कार्यानुभव का अवलोकन भी जरुरी हो जाता है ताकि भविष्य को सही तरीके से समझकर अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सके.

इस विश्लेषण को क्रमवार निम्न प्रकार से अवलोकन किया गया है.

S-strength: प्रस्तावित उत्पाद का बाज़ार मांग उद्यम की सफलता का सबसे बड़ा कारण होगा, साथ ही उद्यमी का सम्बंधित क्षेत्र में एक लम्बे समय से मशाला ब्यापार को सफलता पूर्वक चलाने का अनुभव है, जिससे उद्यमी की कौशल क्षमता का अवलोकन उसके उच्च शिक्षा और लम्बे कार्यानुभव के आधार पर की जा सकती है जिसके कारण उद्यमी के पास बेहतर आर्थिक समझ और तकनिकी ज्ञान के साथ साथ किसी उद्यम को स्थापित करने और सफलतापूर्वक चलाने के लिए जरुरी प्रबंधकीय क्षमता उद्यमी की strength का परिचायक है.

W-weaknesses: चूँकि उद्यमी को व्यावहारिक तौर पर Manufacturing Unit चलाने का अनुभव नहीं है और प्रस्तावित उद्यम के माध्यम से इस क्षेत्र में अपना कदम रख रहे है, जो की वर्तमान के प्रतिस्प्रद्धात्मक ब्यापारिक स्थिति में खुद को स्थापित करने के लिए Manufacturing क्षेत्र में अपने अनुभव की कमियों को दूर करना होगा.

O-opportunities: वर्तमान में उद्यम अनुकूल परिवेश का होना, जहाँ भारत सरकार के द्वारा Make IN India जैसी योजनाओं से Manufacturing क्षेत्र को बढ़ावा देकर उद्यम की स्थापना को आसान बनाया गया है, CGTMSE के तहत उद्यम स्थापित करने हेतु colleteral free loan की सुविधाए मुहैया करवाई जा रही है, वही राजस्थान राज्य सरकार के द्वारा नयी फ़ूड प्रोसेसिंग पालिसी-2015 के माध्यम से पंजीकरण को आसान बनाना और इस क्षेत्र में उद्यम की स्थापना के लिए हर संभव मदद के साथ साथ प्रोत्साहन स्वरुप ऋण subsidy और ब्याज subsidy दिया जाना नए उद्यमी के लिए एक सुनेहरा अवसर है. साथ ही उद्यमी का सम्बंधित क्षेत्र में वर्षो से प्रबंधकीय पद पर काम किया जाना भी उनके लिए Manufacturing क्षेत्र में कदम रखने के लिए एक अच्छा अवसर के रूप में देखा जा सकता है.

T-threats: प्रस्तावित उद्यम को लेकर वर्तमान में किसी तरह की कोई बाधायें नहीं है, लेकिन भविष्य में आने वाले प्रतिस्प्रद्धा को देखते हुवे कुशल विपणन रणनीति की आवश्यकता है.

  1. कार्यान्वयन अनुसूची: उत्पादन चालु करने से पूर्व सभी अलग अलग प्रक्रियावो में लगने वाला अनुमानित समय इस प्रकार से है जिसमे परिस्थिति के आधार पर समायोजन किया जा सकता है
  • Selection of Site                                                                             Done
  • Land Acquisition                                                                           Done
  • SSI Registration                                                                             Done
  • Pollution Clearance                                                                     Applied
  • Other required registration                                                     1 Month
  • Availability of Finance                                                               1 Month
  • Civil work                                                                                         1 Month
  • Machinery Commissioning & Trial Run etc                       1Month

कार्य साथ साथ चलने के कारण अनुमानतः 3 महीने में उत्पादन स्टार्ट कर दिया जायेगा.

  1. महत्वपूर्ण Assumptions:
  • प्रस्तावित उद्यम प्रतिदिन 8 घंटे के दो शिफ्ट में काम करेगी, एवं शाल में 300 दिन काम चलेगा.
  • 1st, 2nd  3rd  के शालो में क्रमश: ये माना गया है की 70%,  80%, 90% उत्पादन क्षमता को प्राप्त किया जाएगा.
  • पूंजीगत व्यय पर ब्याज की दर 12% एवं कार्यशील पूंजी पर 14% की दर से ब्याज अनुमानित माना गया है
  • कुल प्रोजेक्ट कास्ट का 20% मार्जिन मनी के रूप में उद्यमी के द्वारा विनियोग किया जायेगा एवं 80% बैंक ऋण के माध्यम से विनियोग किया जाएगा
  • बैंक ऋणों को 5 वर्षो में पुनर्भुगतान किया जाएगा
  • उद्यम के लिए जरुरी पॉवर के लिए 6 रुपया प्रति यूनिट की दर से लागत माना गया है, एवं जनरेटर के लिए लगने वाला diesal का लागत 60 रुपया प्रति लिटिर माना गया है.
  • विक्रय सम्बंधित खर्च को 0.5% विक्रय के ऊपर माना गया है.
  • Repair & Maintanance के लिए भवन पर 2% और मशीन पर 3% की दर से माना गया है.

 

अपने बिज़नेस को बड़ा करना चाहते है तो रखिये पूरा लेखा जोखा पक्का में…

यदि आप कोई बिज़नेस कर रहे है या फिर स्टार्ट करने वाले है तो आपको एक बात का विशेष ध्यान रखना है कि आप अपने बिज़नेस का पूरा लेख जोखा पक्के में रखे।
– हर खरीद का पक्का बिल फ़ाइल में रखे
– हर बिक्री का इनवॉइस सिरियल नंबर से रखे
– हर दिन प्राप्त होने वाले नकद का कैश बुक में एन्ट्री होने के बाद पैसे को अपने करंट एकाउंट में डिपाजिट करे
– चेक से प्राप्त होने वाला पैसा अपने करंट एकाउंट के नाम से ही प्राप्त करे और एकाउंट में डिपाजिट करे
– कोई भी पेमेंट चेक या ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से ही करे, सिर्फ छोटे पेमेंट जिसका चेक या ऑनलाइन पेमेंट नही हो सकता उसे कैश में भुगतान करके रोज़ का रोज़ कैश बुक में रिकॉर्ड करे।
– स्टॉक रजिस्टर जिसमे हर खरीद और बिक्री के साथ आपके पास उपलब्ध स्टॉक का बैलेंस day wise मेन्टेन करे।
– बिज़नेस के हर ट्रांसेक्शन का रिकॉर्ड किसी एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से रखे।
– हर शाल अपने return समय से सबमिट करें और किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से अपने बिज़नेस का बैलेंस शीट जरूर तैयार करवाये
अगर आप बिज़नेस स्टार्ट करने वाले है या अभी अभी स्टार्ट किया है तो कम से कम ऊपर बताया गया रिकॉर्ड जरूर रखे, जिससे आपके बिज़नेस को आगे बढ़ाने और विस्तृत करने के लिए जरूरी बैंक लोन मिलने में आसानी होगी, साथ ही साथ प्रॉपर रिकॉर्डिंग से आपको अपने बिज़नेस का विश्लेषण करने और भविष्य के लिए बेहतर निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी। ज्यादातर उद्यमी सही लेखा जोखा के अभाव में अपने बिज़नेस को जरूरत के अनुरूप बढ़ाने में असमर्थ रहते है, क्योंकि अपने बिज़नेस के लिए फण्ड की व्यवस्था के लिए बैंक को सभी रिकॉर्ड देना अनिवार्य होता है और इसके न होने पर कोई भी बैंक आपको लोन नही देगा, इसलिए सभी लेन-देन का पक्का लेखा जोखा जरूर रखे।

आखिर क्यों नहीं देते बैंक नये और छोटे उद्यमी को लोन..??

वर्तमान में MUDRA, STANDUP INDIA, STARTUP INDIA, PMEGP, MSME Loan जैसी ऐसी कई योजनाए है जो छोटे एवं नए उद्यमी को आसानी से लोन मुहैय्या करवाकर अपना बिज़नेस स्थापित करने के लिएे प्रोत्साहित करती है।
50 हज़ार से 10 लाख तक के लोन के लिए MUDRA योजना को बनाया गया है।
माइक्रो यूनिट जिसका प्रोजेक्ट कॉस्ट अधिकत्तम 25 लाख है को PMEGP Scheme के तहत प्रोजेक्ट कॉस्ट का 90-95% लोन और 15-35% तक सब्सिडी के माध्यम से ऋण छूट की भी व्यवस्था है।
ऐसे ही women और अनुसूचित जाति/जनजाति को 10 लाख से 1 करोड़ तक के प्रोजेक्ट के लिए Standup India Scheme में ऐसे नियम बनाये गए है जिससे की इन्हें आसानी से लोन मिल सके।
इन सभी स्कीम में ऑनलाईन लोन आवेदन की स्थिति का पूरा रिकॉर्ड रखकर बिचौलियों और दलालो से बचाने के साथ साथ बैंक के द्वारा लोन देने की प्रक्रिया में लिए जाने वाले अधिकत्तम समय को सुनिश्चित किया गया है।
1लाख से लेकर 10 करोड़ तक के प्रोजेक्ट को MSME Scheme में शामिल करके उन्हें बिज़नेस के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट का 70-75% तक बैंकलोन तक की सुविधा दी जा रही है।
RBI के द्वारा सर्कुलर जारी करके 10 लाख तक के बिज़नेस लोन बिना कोलेटरल सिक्योरिटी एवं गारंटी के देने का निर्देश दिया गया है, साथ ही CGTMSE जैसी स्कीम के माध्यम से सरकार अपनी गारंटी पर 2 करोड़ तक के अच्छे प्रोजेक्ट को बिना कोलेटरल सिक्योरिटी एवं गारंटी के लोन देने की व्यवस्था की गई है।

लेकिन इतनी योजनाओ के बावजूद हकीकत यह देखा जा रहा है कि अधिकत्तम नए एवम छोटे उद्यमी अपने बिज़नेस के लिए जरूरी लोन के लिए एक बैंक से दूसरे बैंक के चक्कर लगा लगाकर थक जाता है लेकिन उन्हें ऐसा लोन नही मिल पा रहा है, बैंक उन्हें लोन देने से मना कर देते है।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है,, बैंक नए उद्यमी से सही से बात नही करती उन्हें बिज़नेस स्टार्ट करने के लिए जरूरी लोन की सुविधा उपलब्ध नही करवाती..?
कई बैंक और नए उद्यमियों से बात करने के बाद जो तथ्य सामने आए वो मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ।

अधिकत्तम नए और छोटे उद्यमी जो बैंक से लोन लेने जाते है;
– वो अपने बिज़नेस का प्रोजेक्ट रिपोर्ट तक तैयार नही करते है, जो कि बिज़नेस लोन के लिए सबसे महत्वपूर्ण रिपोर्ट होता है जो बैंक को उद्यमी और उसके द्वारा किये जाने वाले बिज़नेस के बारे में सबकुछ बताता है, महत्वपूर्ण जानकारी जो प्रोजेक्ट रिपोर्ट से मिलती है के आधार पर बैंक तय करते है कि उद्यमी में बिज़नेस से लाभ कमाकर लोन वापस करने की क्षमता है या नही लेकिन ज्यादातर नए उद्यमी जो बैंक पहुँचते है लोन के लिए उन्होंने अपने बिज़नेस का प्रोजेक्ट रिपोर्ट तक तैयार नही किया होता है ऐसे में किसी भी बैंक के द्वारा लोन देने संभव नही होता।
– प्रस्तावित उद्यम के संबंध में वास्तविक रूप से डिटेल मार्केट रिसर्च करना जरूरी होता है जिसके आधार पर उसमे प्रयोग होने वाला कच्ची सामग्री की लागत और उपलब्धता, बाजार में उनके प्रोडक्ट की डिमांड, कॉम्पिटिशन, विक्रय मूल्य, होने वाला प्रॉफिट जैसी बेसिक बातो का सही सही जानकारी होता है, डिटेल मार्केट रिसर्च के अभाव में बस सुनी सुनाई बातों के आधार पर ज्यादातर नए उद्यमी अपना बिज़नेस स्थापित करने का निर्णय लेकर बैंक के पास लोन के लिए आवेदन करते है, यदि ऐसे प्रोजेक्ट को बैंक के द्वारा लोन दिया जाता है तो आगे चलकर ऐसा प्रोजेक्ट फैल होता है और बैंक से लिया कर्ज़ के साथ साथ उद्यमी अपनी जमा पूंजी भी डुबो देते है।
– मैनुफैक्चरिंग प्रोसेस, उत्पादन में प्रयोग किया जाना वाला तकनीक, प्रोडक्ट की क़्वालिटी के साथ होने वाला प्रोसेसिंग लॉस का सही जानकारी होना जरूरी है ताकि आप कम लागत में अच्छा प्रोडूक्ट का निर्माण कर सके जो कि आपकी सफलता को तय करती है, लेकिन ऐसी जानकारी के अभाव में बैंक का लोन देने से मना कर देना बैंक और उद्यमी दोनो के हित मे होता है क्योंकि इन जानकारी के अभाव में बिज़नेस में सफल होना प्रैक्टिकल रूप से possible नही होता।
– बैंक लोन के पहले उद्यम के लिए जरूरी जमीन का पूरा पेपर या लीज़ एग्रीमेंट होना जरूरी हित ह जो कि ज्यादातर उद्यमी के पास नही होता, जमीन के लिए बैंक लोन नही देते एवं उद्यमी को चाहिए कि बैंक में लोन के लिए जाने से पहले वो अपने बिज़नेस का लोकेशन तय करके आवश्यक जमीन की व्यवस्था कर ले ताकि बैंक को आपके द्वारा स्थापित किया जाने वाला बिज़नेस का loacation देखना हो तो उनकी team देख सके, जबतक उद्यमी के पास जरूरी जमीन नही होगा बैंक लोन देने के लिए बात नही करेगा।
– बिज़नेस में उद्यमी का अपना पैसा नही लगा होगा तो उसपर कोई रिस्क नही रहेगा और ऐसे में बिज़नेस के साथ साथ बैंक लोन का पैसा डूबना का पूरा संभावना रहता है, इस कारण उद्यमी को प्रोजेक्ट कॉस्ट का 25-30% पैसा खुद का लगाना जरूरी होता है साथ ही ये पैसा वो कहाँ से लगाएगा इसका प्रूफ बैंक को देना होता है अगर उद्यमी के पास ऐसा मार्जिन मनी नही है तो बैंक लोन देने से मना कर सकता है।
– बिज़नेस के लिए जरूरी रेजिस्ट्रेशन और NOC के लिए आवेदन की कॉपी बैंक को देना जरूरी है जबकि बिज़नेस लोन के लिए आवेदन देने वाले ज्यादातर नए उद्यमी ऐसा नही करते जिसके कारण बैंक उन्हें लोन देने से मना कर देते है।

अगर आप भी बैंक लोन की सहायता से अपना बिज़नेस स्थापित करना चाहते है तो ऊपर बताये गए उन कमियों को दूर कीजिये जो अन्य दूसरे उद्यमी करते है जिसके कारण उन्हें बैंक लोन देने से मना करते है,, फिर सही प्रकार से अपना लोन फ़ाइल तैयार करके डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ अपने एरिया के 4-5 बैंकों से बिज़नेस लोन के लिए बात कीजिये निश्चित रूप से आप अपना बिज़नेस स्थापित करने और उसे लगातार आगे बढ़ाने में सफल हो सकेंगे।।

How to Prepare Detail Project Report For Business Loan( बिज़नेस लोन के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट कैसे बनाये)

Project report

यदि आप कोई भी बिज़नेस स्टार्ट करना चाहते है चाहे वो एक लाख का हो या 100 करोड़ का हो

चाहे आप

ट्रेडिंग- मतलब वस्तुवो को सिर्फ खरीदकर बेचना चाहते हो

सर्विस- मतलब दुसरो को किसी तरह सुविधा या जानकारी देना देना चाहते हो

मैन्युफैक्चरिंग- मतलब किसी प्रोडक्ट को बनाना चाहते हो

एग्रीकल्चरल & फार्मिंग- किसी तरह का फसल (चावल/दाल/मसाला/सब्जी/फल/फूल या फिर किसी तरह के पेड़ लगाना इत्यादि) लगाना या फिर पशुपालन( जैसे गाय-भेस/ बकरी / मुर्गी / मछली / खरगोस / भेड़ इत्यादि) का काम करना चाहते हो

स्टार्टअप- किसी नए innovative idea (जैसे-OLA/UBER/OLX/FACEBOOK/YOUTUBE/TWITTER ) के आधार पर कोई बिज़नेस प्लान करना कर रहे हो

तो आपको अपने बिज़नेस को स्टार्ट करने और उसे आगे बढाने के लिए पैसो की जरुरत है, और जब भी आप अपने बिज़नेस को फाइनेंस करने के लिए किसी भी बैंक के पास जायेंगे तो वो सबसे पहले आपका बिज़नेस प्लान का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट आपसे मांगेगा, आप सरकार की किसी भी स्कीम में loan लेना चाहे आपको इसके लिए सबसे पहले प्रोजेक्ट रिपोर्ट की आवश्यकता होती है क्योंकि प्रोजेक्ट रिपोर्ट एक ऐसा रिपोर्ट होता है जिसमे हर वो इनफार्मेशन होता है जो बैंक आपको loan देने से पहले जानना चाहता है, और आपके प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर ही बैंक आपको loan देने या ना देने का फैसला लेता है.

प्रोजेक्ट रिपोर्ट आपको डिफाइन करता है, आपके business idea को डिफाइन करता है और इस idea के आधार पर फ्यूचर प्रोजेक्शन को भी डिफाइन करता है, दुसरो में और आपमें क्या अंतर है इस बात को बताता है

इसलिए ये जरुरी है की आप सबसे पहले अपने बिज़नेस प्लान का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाए, अब आपके लिए ये जानना जरुरी है की आखिर प्रोजेक्ट रिपोर्ट को कैसे बनाया जा सकता है और इसमें क्या क्या इनफार्मेशन देना है.

तो आइये step by step यहाँ समझते है…..

  1. Executive Summary & Promoter’s Background : सबसे पहले आप बिज़नेस को स्टार्ट करने वाले मतलब आपके बारे में बताइए, अगर पार्टनरशिप या कंपनी के फॉर्म में स्टार्ट करना चाहते है तो जितने भी पार्टनर और डायरेक्टर है उनका डिटेल्स और बैकग्राउंड जैसे उनका नाम, पता, अनुभव, क्वालिफिकेशन येसब कुछ बताइये
  2. Project Background : उसके बाद फिर आप अपने बिज़नेस के बारे में बताइये की आप क्या बिज़नेस करना चाहते है, इस तरह के और कौन कौन से बिज़नेस चल रहे है आपका idea उन सबसे बेहतर क्यों है और इतनी कॉम्पिटीशन के बावजूद भी आपका आप कैसे अपने IDEA में सफल हो सकते है.
  3. Land /Shed Details & Logistics : इसके बाद आप यह बताइये की आप जो बिज़नेस setup करना चाहते है उसमे जमीन या फिर बिल्डिंग का स्पेस होगा वो किस किस काम के लिए और कुल कितना जरुरी है, और इसका location कहाँ होगा, अगर आपने पहले से जगह ली हुई है तो उसके बारे में भी बताये और साथ ही ये भी बताने का कोशिश करे की आपका बिज़नेस का location है वो कैसे आपके लिए फायदेमंद है, अगर आप कोई फैक्ट्री लगा रहे है तो फिर इसके साथ Building Construction Plan भी बताइये की आपका कंस्ट्रक्शन प्लान क्या है.
  4. Procurement Strategy of Raw Material /Stock : यहाँ आपको यह बताना जरुरी है की Raw Material /Stock के supplier कौन कौन है और आसानी से ये उपलब्ध है या नहीं, सामान्यतः आप किनसे इन्हें खरीद सकते है और इसकी लागत क्या होगी और आपको कितने दिनों के स्टॉक की आवश्यकता होगी इत्यादि जो भी जानकारी आप दे सकते है उतना देने की कोशिश करे.
  5. Techno-Commercial Viability Assessment : वर्तमान युग Technology का है मतलब यदि आप पुराने तकनीक पर आधारित ब्यापार करेंगे तो आपका लागत ज्यादा होगा और आप मार्केट से बाहर हो जायेंगे, इसलिए यहाँ ये बताना जरुरी है की कैसे आपके द्वारा प्रयोग किया जाने वाला टेक्नोलॉजी है वह commercially है, और निकट भविष्य में टेक्नोलॉजी में आने वाले बदलाव से इसपर ज्यादा रिस्क नहीं है इत्यादि.
  6. Capacity & Production: यहाँ आप इस बात को बताए की आप जो बिज़नस सेटअप करने जा रहे है उसका प्रोडक्शन कैपेसिटी कितना है और आप वास्तव में कितना प्रोडक्शन होने का अनुमान लगा रहे है, इस बात को सही आंकलन के आधार पर बताये, क्योंकि जितना आपका प्रोडक्शन होगा उसी पर आपका पूरा फाइनेंसियल एनालिसिस होगा जैसे की टर्नओवर और प्रॉफिट जो की सीधे आपके प्रोडक्शन से लिंक है। यदि आपको इसकी जानकारी नहीं है तो जिनसे आप मशीन खरीदेंगे उनसे इसके बारे में जानकारी ले लीजिए।
  7. Pollution Control: किसी भी तरह का Pollution फिर चाहे वो water/Air/ ध्वनि Pollution हो आपको ये बताना है कि आपके यूनिट से ऐसा कोई pollution होता है कि नहीं और अगर होता है तो उसको कन्ट्रोल करने के लिए आप कौन कौन से pullution control equipment लगाएंगे, साथ ही अपने राज्य के pollution control board से भी आपको अपने यूनिट लगाने के लिए NOC लेना है, और ऐसा NOC आपको मिल गया है या अभी प्रोसेस में है इस बात को भी बताए।

प्रोजेक्ट रिपोर्ट का कोई दायरा नहीं होता, ना ही इसका कोई specific फॉर्मेट होता है, बस आपको ये कोशिश करना है कि आप बिज़नस से सम्बंधित जितना डिटेल इनफार्मेशन दे सकते है उतना दे जिससे की इसे पढ़ने वाले को आपके बिज़नस प्लान को समझकर ये निर्णय लेने में आसानी हो की आपका बिज़नस सफल हो सकता है अथवा नहीं।

  1. Mode of Waste Disposal : आपके यूनिट से निकलने वाले wastage का निपटारा आप कैसे करेंगे इस बात को यहाँ आप बताइए, अगर संभव हो तो waste recycling के छोटे मशीन को लगाकर इसका निबटारा करे।
  2. Manufacturing Process Flow diagram:आप जो भी प्रोडक्ट बनाने वाले है वह कैसे बनता है, और उसका step-by-step प्रोसेस क्या है और हर स्टेप में लगने वाला समय और लागत की पूरी जानकारी यहाँ देने की कोशिश करे।
    आप मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस का एक डायग्राम भी दे जिससे पढ़ने वाला ज्यादा बेहतर ढंग से इसे समझ सके।
    आप अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट को जितना ट्रांसपेरेंट रखेंगे सामनेवाले को आपके प्रोजेक्ट की सफलता पर उतना ही ज्यादा यक़ीन होगा।
  3. Infrastructure Source: आपको पानी और बिजली की कितनी आवश्यकता होगी और इसका प्रबंध आप कैसे करेंगे ये यहाँ बताइये, मुख्यतः राज्य सरकार के सम्बंधित विभाग में आपको पानी और बिजली के कनेक्शन के लिए आवेदन देना होता है।
  4. Marketing Strategy: किसी प्रोडक्ट को बना लेना आसान है मुश्किल है तो उसे सेल करना, और इसके लिए आपको एक सही मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनानी जरूरी है जो की आपके इंडस्ट्रीज़,प्रोडक्ट,लागत, उत्पादन, बाजार डिमांड, और लोकेशन के आधार पर बनाई जा सकती है। अच्छी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी आपको अपने बिज़नस में सफल होने के लिए बहुत जरुरी है, बाजार में उपलब्ध कॉम्पिटिशन के बीच आप जितना प्रोडक्शन करेंगे उसे कैसे मार्केट में सेल करेंगे इस बात को सही तरीके से यहाँ समझाए।
  5. Implementation schedule: यहाँ आपको यह बताना है कि आपके प्लान के मुताबिक अपने यूनिट को लगाने में अलग अलग जरुरी स्टेप में कितना वक़्त लगेगा, और ओवरआल कितने वक़्त में आपका यूनिट स्टार्ट हो जाएगा। जैसे बैंक लोन, ज़मीन, सिविल कंस्ट्रक्शन, मशीन लगाने और जरुरी रजिस्ट्रेशन और NOC लेने में आपको कितना वक़्त लगेगा।
  6. SWOT analysis: यहाँ आपको अपने और अपने बिज़नस से सम्बंधित

S-Strength:     Service, Product quality, Ideas

W-Weakness: Marketing, Skilled staff, Funding

O-Opportunities: Govt Policy, Competitions, Expending Market,

T- Threats  : Technology, Competitions, Large Manufacturer

Assumptions : कुछ Assumptions जो आपके अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट में देनी जरुरी है 

  • यूनिट प्रतिदिन कितना घंटा या कितना शिफ्ट में चलाया जाएगा
  • 1st year, 2nd year और इसके बाद आने वाले हर शालो में अनुमानित उत्पादन कूल उत्पादकता का कितना होगा
  • पूंजीगत व्यय एवं कार्यशील पूंजी में ब्याज की दर क्या मानकर प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनायीं गयी है
  • प्रोजेक्ट रिपोर्ट में आपके और बैंक loan का ratio क्या होगा
  • बैंक loan को कितने वर्षो में वापस किया जायेगा
  • यूनिट में पॉवर का पैर यूनिट कास्ट क्या आएगा, जैसे बिजली का रेट पर यूनिट और genset में diesal का खर्च क्या आएगा
  • selling & distribution में कुल विक्रय का कितना प्रतिशत खर्च किया जायेगा
  • repair and maintanance में कुल लागत का क्या प्रतिशत खर्च माना गया है

Attachments: आपको अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ कुछ documents भी attach करना है 

  • Land Detail
  • SME Registration (Udyog-adhaar)
  • Shop & Establishment Registration
  • Pollution NOC (Application status)
  • Details of Power Connection (Application status)
  • CIBIL score
  • Project Report
  • Proof of Equity contribution
  • Income Tax Return
  • Machine Quotation
  • Raw Material Quotation
  • Civil Construction cost estimate
  • PAN No
  • ID/Address Proof
  • Caste certificate
  • Educational & experience certificate
  • Guarantor (exempt under CGTMSE Scheme)
  • Collaterals Security (FD/Gold/Insurance/Property etc)exempt under CGTMSE Scheme
  • Guarantor (exempt under CGTMSE Scheme) Collaterals Security (FD/Gold/Insurance etc)

List of Annexure for Financial Analysis: आपको अपने प्रोजेक्ट का वित्तीय विश्लेषण करना और उसका Annexures को प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ लगाना है.

Summery Report Annexure-I
Land & Building Annexure-II
Plant & Machinary Annexure-III
Preliaminiary Expenditure Annexure-IV
Utilities Requirenment Annexure-V
Manpower Requirenment Annexure-VI
Consumble Store Annexure-VII
Repair and Maintanance Annexure-VIII
Projected Revenue details Annexure-IX
Project Cost and Source of Finance Annexure-X
Bank Loan repaymnet schedule Annexure-XI
Depreciation schedule Annexure-XII
Profitability Estimate Annexure-XIII
Projected Balance Sheet Annexure-XIV
Cash Flow Statement Annexure-XV
Break Even Analysis Annexure-XVI
Pay Back Period Annexure-XVII
Internal Rate of Return Annexure-XVIII

जब भी हम business loan के लिए बैंक को approach करेंगे तो हमे अपने business project को बैंक से फाइनेंस करवाने में दो प्रॉब्लम आएँगी.

  1. मार्जिन मनी- बैंक के नियमो के आधार पर यदि हम बैंक से business loan ले रहे है तो इसके लिए ये जरुरी है की business स्टार्ट करने वाले का भी उस business में अपना पैसा लगाया जा रहा हो, जो की कम से कम प्रोजेक्ट कास्ट का 25% होना चाहिए तब बैंक 75% loan देने के लिए तैयार होगा, जैसे आपका प्रोजेक्ट कास्ट 1 करोड़ का है तो आपको मार्जिन मनी के रूप में 25 लाख रुपया अपना लगाना होगा जिसे मार्जिन मनी बोला जाता है तब बैंक आपको 75 लाख का loan देने के लिए तैयार हो सकता है , अगर business स्टार्ट करने वाले के पास मार्जिन money नहीं है तो ऐसी स्थिति में बैंक आपके प्रोजेक्ट को फाइनेंस नहीं करेगा.
  2. बैंक जब प्रोजेक्ट कास्ट का 75% फाइनेंस करेगा तब इसके लिए आपसे collateral security देने को बोला जायेगा, जिसमे आपको जमीन,मकान,शेयर,ज्वेलरी, फिक्स्ड डिपाजिट,इन्सुरेन्स इत्यादि का पेपर बैंक के पास गिरवी रखना होता है, साथ ही साथ किसी ऐसे ब्यक्ति को आपके द्वारा लिए जाने वाले loan के लिए guarantor भी बनाना पड़ता है जिसकी guarantee पर बैंक ये भरोसा कर सके की यदि आप loan का repayment करने में डिफ़ॉल्ट करते है तो ऐसा ब्यक्ति आपके loan को चुकाने की क्षमता रखता है.

अब यदि देखा जाय जब आप कोई नया business setup करने जा रहे है तो ज्यादातर लोगो के पास अपने business प्रोजेक्ट को बैंक से फाइनेंस करवाने के लिए ना तो अपने हिस्से का मार्जिन मनी होता है और न ही जरुरी collateral security और guarantor होता है, और इन दोनों के अभाव में न तो बैंक आपको business loan देगा न ही आपका business setup करने का सपना पूरा होगा.

इस समस्या से निकलने और अपने business idea को मूर्त रूप में लाने के लिए हमे क्या करना है, इस बात को अच्छे से समझ लीजिये..

मार्जिन मनी जो की प्रोजेक्ट कास्ट का 25% लगाना होता है, जो यदि आपके पास नहीं है तो कुछ विशेष स्थिति में बैंक मार्जिन मनी को भी फाइनेंस करता है, जैसे:-

  • आपके पास कोई higher qualification है ( MBA,Engineering etc )
  • जब आपने अपने प्रोजेक्ट में काफी रिसर्च की है और अब आपको उसका काफी knowledge है
  • जब आप कोई नया innovative idea के तहत business स्टार्ट कर रहे है
  • यदि आपके पास ऐसा higher digree या knowledge नहीं है तो भी आप मार्जिन मनी के लिए SIDBI के किसी भी ब्रांच में जाकर मिल सकते है, SIDBI नए entrepreneurs को मार्जिन मनी के लिए loan देती है जिसे Risk Capital या Seed Capital बोला जाता है. इसके लिए SIDBI ने India Aspiration Fund और SMILE (SIDBI Make In India Loan for Small Enterprise) जैसी स्कीम चला रही है जिसमे नए enterpreneurs को मार्जिन मनी के लिए support किया जाता है.
  • मार्केट में कई venture capitalist Firm भी है जो नए business को setup करने और चलाने में अपना पैसा लगाती है, आप अपने प्रोजेक्ट के लिए ऐसे venture capitalist Firm से भी संपर्क कर सकते है.
  • यदि सभी कोशिशो के बाद भी आपको बैंक से मार्जिन मनी के लिए loan नहीं मिल पा रहा है तो फिर, आपके पास जितना पैसा है और आप अपने family / friends से अपने business के लिए जितना पैसा जुटा पाते है उतने ही पैसो को मार्जिन मनी का 25% हिस्सा मानते हुवे 75% बैंक loan के लिए apply करे, मतलब यदि आपके पास 10 लाख रुपया ही है तो फिर आप 1 करोड़ की जगह maximum 40 लाख तक का ही business project तैयार करे जिससे की 30 लाख का loan आपको बैंक से आसानी से मिल जायेगा, फिर धीरे धीरे अपने business को बड़ा करे.
  • यदि आपका प्रोजेक्ट कास्ट 25 लाख या इससे कम का है तो फिर PMEGP (Prime Minister Employment Generation Programme) में भी आप loan ले सकते है, इसमें अच्छी बातये है की इसमें आपको मार्जिन मनी सिर्फ 5-10% ही लगाना होता है और प्रोजेक्ट कास्ट का 90% तक आपको loan मिल सकता है, साथ ही इस स्कीम में 15-35 % तक का subsidy भी दिया जाता है जो की आपको अपने business को लगाने और उसे सफलता पूर्वक चलाने के लिए प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है. और आपका प्रोजेक्ट कास्ट 25 लाख से ज्यादा है तो फिर अन्य लोगो को पार्टनर के रूप जोड़कर भी आप PMEGP में अपने प्रोजेक्ट को फाइनेंस करवा सकते है.

दूसरी जो समस्या है collateral security और guarantor का तो इसके लिए भारत सरकार का एक स्कीम है CGTMSE (Credit Guarantee Fund Trust For Micro and Small Enterprises) जिसमे यदि आपका प्रोजेक्ट हर तरह से अच्छा है तो फिर 2 करोड़ तक का loan आप बिना किसी collateral security और guarantor के ले सकते है, इसके लिए आप बैंक से अपने loan को CGTMSE के तहत करने को बोल सकते है, ये स्कीम बहोत ही अच्छी स्कीम है जो की आपको collateral security और guarantor के बिना भी business loan दिला सकती है.

 

मैनुफैक्चरिंग यूनिट के लिए जरूरी रजिस्ट्रेशन और NOC

मैनुफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए आपको जरूरत है;
– जमीन:जहाँ आप अपना फैक्ट्री लगा सके, जमीन आपका खुद का नही है तो फिर आप खरीद सकते है या फिर काम से कम 3 शाल के लिए लीज पर ले सकते है, राज्य सरकार औद्योगिक क्षेत्र में भी आप उद्योग लगाने के लिए जमीन लीज पर ले सकते है।
– फिर इसमें आपको अपने यूनिट के लिए जरूरी मशीन के सप्लायर के द्वारा बताए गए निर्देश के अनुसार सिविल कंस्ट्रक्शन करवाना है जिसके लिए सिविल इंजीनियर से आप सिविल डिज़ाइन और कॉस्ट एस्टीमेट तैयार करवाये।
– 5-7 मशीन सप्लायर से मिलकर जरूरी मशीन का सिलेक्शन करे और साथ ही मशीन का quotation भी जरूर ले लीजिए। मशीन के सप्लायर से आपको जरूरी पॉवर और मैन्यूफैक्चरिंग प्रॉसेस का पूरा टेक्निकल जानकारी के साथ साथ प्रोडक्ट को बनाने की कुल लागत और बाज़ार में डिमांड के संबंध में भी जानकारी मिलेगी, पहले से उनके द्वारा लगाई गई यूनिट में जाकर भी प्रैक्टिकल रूप से चालू यूनिट देखकर पूरा प्रोसेस को समझ सकते है।
– Raw Material के सप्लायर से मिलकर तय करे कि आपको जरूरी कच्चा माल का कॉस्ट क्या आएगा और पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल बाजार में हमेशा उपलब्ध है या नही, ऐसा न हो अधिक डिमांड के वक़्त आपको कच्चा माल न मिले और आप लिए गए आर्डर को इसके अभाव में पूरा न कर सके। बहुत से यूनिट सिर्फ कच्चे माल के अभाव में या उच्च लागत के कारण बंद हो जाता है, इस कारण आपको कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता के साथ साथ उसके लागत का सही विश्लेषण आपकी सफलता को तय करेगा। कच्चे माल का quotation भी जरूर ले लीजिए।

अब आप अपने यूनिट के लिए Total Investment=Land+Civil Construrtion+Plant & Machine+Raw Material & employee Salary for one cycle period) कैलकुलेट कीजिये, जिससे आपको पता चलेगा कि आपको आखिर कितने पैसो की जरूरत है अपने यूनिट को मूर्त रूप देने में।
Total Project Cost का आपको 25-30% पैसा खुद का लगाना है जो कि आप अपने फैमिली या फ्रेंड्स से ले सकते है या फिर पार्ट्नर को शामिल कर सकते है जो इन्वेस्टमेंट कर सके या फिर आप venture capital firm से भी अपने प्रोजेक्ट में equity investment के लिए संपर्क कर सकते है।
70-75% के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर बैंक लोन के लिए अप्लाई कर सकते है।

Registration & NOC;
– उद्योग आधार MSME (udyogaadhaar.gov.in)
– GST (https://www.gst.gov.in)
– बैंक एकाउंट
– Trade लाइसेंस ( Local Muncipal कारपोरेशन)
– Pollution NOC (State pollution Board)
-Power Connection(State Electricity Board)
– Factory Registration (Labour Commissioner office)
– FSSAI For food products(fssai.gov.in)
– Company Registration (mca.gov.in)

State Govt के single window e-portal पर जाकर किसी भी यूनिट के लिए जरूरी सभी Registration & NOC के लिए CAF(Combined application form) के द्वारा भी अप्लाई किया जा सकता है जो कि काफी आसान है।

डाक्यूमेंट्स जो बैंक लोन के लिए जरूरी है;
– डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट
– जमीन का पेपर या लीज़ एग्रीमेंट
– मशीन का quotation और सप्लायर डिटेल
– Raw मटेरियल का quotation और सप्लायर डिटेल
-I.Tax Return तीन साल का(यदि है)
-आधार नंबर & पैन नंबर
– NOC फ्रॉम पॉल्युशन बोर्ड या एप्लाइड कॉपी
– एप्लाइड कॉपी फ़ॉर पॉवर कनेक्शन
– गारंटर और कोलैटरल सिक्योरिटी का डिटेल
बैंक लोन आप बैंक में जाकर या बैंक के पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते है।
25 लाख तक का प्रोजेक्ट के लिए PMEGP के पोर्टल पर https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal अप्लाई किया जा सकता है।
इसके अलावा https://www.standupmitra.in के पोर्टल पर भी आप 10 लाख से 1 करोड़ तक के प्रोजेक्ट के लिए भी लोन अप्लाई कर सकते है जिसमे न्यूनतम 51% हिस्सा सामान्य महिला/अनुसूचित जाति-जनजाति उद्यमी का होना अनिवार्य है।

Manufacturing Business स्टार्ट करने की step by step जानकारी

कोई भी मैन्युफैक्चरिंग business स्टार्ट करने के लिए जरूरी है एक idea, एक ऐसा idea जो आपको सफलता की ऊंचाइयो तक ले जा सकता हो जिस idea को मूर्त रूप में लाने के लिए आप ब्याकुल हो चुके हो क्योंकि किसी भी सफल business की शुरुवात एक अच्छे idea से ही होती है जिसके आधार पर आप दुनिया में अपने प्रोडक्ट को sale करना चाहते हो, अतः सबसे पहले आपके पास एक idea होना चाहिए जिसके आधार पर आपका प्लान बिलकुल क्लियर हो की आप किस चीज़ का business करना चाहते है और आप क्या manufacturing करना चाहते है उस product के सम्बन्ध में आधारभूत जानकारी आपके पास होनी चाहिए जैसे:

  • आपके प्रोडक्ट का मार्केट में डिमांड कितना है
  • इस प्रोडक्ट का कास्टिंग और बाज़ार मूल्य कितना है
  • प्रोडक्ट को बनाने की प्रक्रिया क्या है
  • इसके लिए प्रयोग किया जाने वाला कच्चे माल की उपलब्धता
  • बाज़ार में इससे सम्बंधित अन्य निर्माता एवं प्रतिस्प्रद्धा का सही आंकलन
  • जबकि आप अपना business idea एवं तैयार किया जाने वाला प्रोडक्ट तय कर चुके है तो फिर आपको अपने business का स्वरुप के सम्बन्ध में ये निर्णय लेना है की आप sole proprietorship/ one Person Company/ Partnership/Limited Liability Partnership/ Pvt Ltd Co./Public Limited Co में से किस स्वरुप में अपना business स्टार्ट करना चाहते है जो स्वरुप आपके लिए उचित हो उसके लिए जरुरी पंजीकरण करवाए.
  • location तय करे जहाँ आप अपना फैक्ट्री लगा सकते हो, इसके लिए आपको जमीन की आवश्यकता होगी जो आपकी खुद की हो सकती है, जिसे आप लीज़ पर ले सकते है या जिसे आप फैक्ट्री लगाने के लिए खरीद सकते है, ध्यान रखे जहाँ आप अपना फैक्ट्री लगाना चाहते है वहां आपको
  • फैक्ट्री स्थापित करने के लिए पर्याप्त जमीन मिल सके
  • मजदूर आसानी से और अपेक्षाकृत कम लागत पर मिल सके
  • बिजली और पानी की उचित व्यवस्था हो
  • कच्चा माल लाने और तैयार माल को बाज़ार तक आसानी से और कम से कम परिवहन लागत पर पहुँचाया जा सके
  • स्थानीय माहौल अपेक्षाकृत शांतिमय हो जिससे की फैक्ट्री के संचालन में कोई रुकावट ना आये और सभी सामान, मशीन एवं कर्मचारी सुरक्षित रहे

सामान्यतः हर राज्य सरकार के द्वारा उद्योगों के विकाश के लिए कई जिलो में औद्योगिक क्षेत्र (Industrial area) बनाये जाते है जिन क्षेत्रो में उद्योग की स्थापना और इसके सफल संचालन के लिए जरुरी सभी आधारभूत सुविधाओ को ध्यान में रखा जाता है और लम्बी अवधि के पट्टे पर अनुबंध के तहत उद्योग लगाने वालो को दिया जाता है साथ ही इन क्षेत्रो में फैक्ट्री लगाने के लिए बिजली, पानी का कनेक्शन हो या municipality एवं pollution control board द्वारा दिया जाने वाला अप्रूवल हो अपेक्षाकृत ज्यादा आसानी से मिल सकता है अर्थात किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री लगाना सही निर्णय साबित हो सकता है

  • Market Research : अपना business area भी तय करे जहाँ-जहाँ आप अपने प्रोडक्ट्स को बेच सकते है अर्थात आपके प्रोडक्ट के लिए उपलब्ध बाज़ार को समझे और वहां अपने प्रोडक्ट से सम्बंधित कुछ जरुरी मार्केट रिसर्च कर ले जैसे:
  • आपके प्रोडक्ट का अनुमानित sale कितना होगा
  • अपनी market strategy तय करे
  • अपने customer तक पहुँचने के लिए जरुरी कदम तय करे
  • प्रतिस्प्रद्धा और बेहतर क्वालिटी को ध्यान में रखते हुवे sale price तय करे
  • इस बात का भी विश्लेषण अवश्य कर ले कि बाज़ार में कितने दिनों के लिए आपका पैसा फसेगा अर्थात आपके द्वारा जो प्रोडक्ट इन मार्केट में बेचा जाना है वो अन्य सप्लायर के द्वारा नकद या उधार में बेचा जा रहा है यदि उधार में बिक रहा है तो औसतन कितने दिनों के बाद आपको पैसा मिल सकता है साथ ही कोशिश कीजिये ये जानने का की सामान्यतः कितना प्रतिशत उधार में दिया जाने वाला पैसा डूब जाता है जिससे की आप अपने business में होने वाले अनुमानित लाभ और जरुरी पूंजी का सही प्रकार से आंकलन कर सके
  • सभी प्रकार के खर्चो के आधार पर अपने लागत का सही आंकलन करे
  • उपर्युक्त सभी जानकारी के आधार पर अपना अनुमानित लाभ एवं लाभ का प्रतिशत क्या होगा इसकी गनना करे
  • Plant & Machinery Suppliers से मिले: उन suppliers की एक लिस्ट तैयार करे जो आपके प्रोडक्ट को बनाने के लिए जरुरी machinery बनाते है और फिर एक एक करके उनमे से कुछ प्रमुख supplier से मिलकर machine से सम्बंधित सभी बातो को जाने जैसे:
  • supplier के द्वारा बनाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के manual/semi automatic/fully automatic machines
  • इन मशीनों को चलाने के लिए कितनी बिजली की आवश्यकता होगी
  • इन मशीनों को चलाने के लिए कितने मजदूरों की आवश्यकता होगी
  • इन मशीनों के द्वारा प्रतिदिन कितनी संख्या में तैयार माल बनाया जा सकता है
  • मशीन की life कितने वर्षो की होगी
  • मशीन का ऑपरेटिंग कास्ट क्या होगा

प्रत्येक मशीन की कीमत,मशीन की life और इसके ऑपरेटिंग कास्ट के साथ इसके द्वारा प्रतिदिन तैयार किये जाने वाले माल की संख्या के आधार पर आप ये तय कर सकते है की आपके लिए कौन सा मशीन सबसे अच्छा हो सकता है, यदि मशीन की कीमत अपेक्षाकृत ज्यादा है तो आप अन्य देशो में भी इसकी कीमत और तकनीक के सम्बन्ध में जानकारी हासील करे (वर्तमान में इन्टरनेट के माध्यम से देश और विदेशो के suppliers के बारे में आसानी से जानकारी इकठ्ठा करके उनसे बात किया जा सकता है )

मशीन का चुनाव करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखे की ये लेटेस्ट तकनीक पर आधारित हो जिससे की इसके द्वारा बनायीं जाने वाली प्रोडक्ट की लगत कम हो और जल्द ही आपको नयी तकनीक आने की वजह से मशीन को बदलने की जरुरत न पड़े

जब आप suppliers से मशीन के सम्बन्ध में मिलने के लिए जाय तो उनकी मशीन के द्वारा कच्चे माल से तैयार माल बनाने की प्रक्रिया को भी अच्छी तरह से समझने की कोशिश करे, साथ ही साथ इस प्रक्रिया के हर स्टेज पर लगने वाले लगत को बारीकी से समझ ले जिससे आप अपेक्षाकृत बेहतर अनुमानित लाभ-हानि का आंकलन कर सकेंगे, आप जिस प्रोडक्ट को बनाना चाहते है उसके लिए जरूरी मशीन के suppliers के पास आपके प्रोडक्ट से सम्बंधित सभी जानकारिय होती है जैसे की उसका बाज़ार डिमांड, बाज़ार में उपलब्ध प्रतिस्प्रद्धा, manufacturing प्रोसेस, कास्ट price और competitive मार्केट में मिलने वाला sale price, तकनिकी जानकारी , कच्चे माल के suppliers, अच्छी क्वालिटी और कम कीमत पर कच्चे माल की उपलब्धता, बैंक से आपके प्रोजेक्ट फाइनेंस करवाने की प्रक्रिया इत्यादि इन सभी बातो का मशीन के suppliers के पास अच्छी जानकारी होती है इस कारण कम से कम 4-5 supplier से मिले और आपके लिए जरुरी सभी बातो को अच्छी तरह से समझकर नोट कर ले इससे आपको अपने द्वारा स्टार्ट किये जाने वाले business की समझ अपेक्षाकृत और ज्यादा बढ़ जाएगी और आप हर जगह सही निर्णय ले सकेंगे. यदि आप चाहे तो उनके द्वारा पूर्व में स्थापित अन्य customers के पास चलती हुई मशीन को भी जाकर देख सकते है जिससे की आपको उनकी मशीन और इसके द्वारा तैयार किये जाने वाले प्रोडक्ट्स की क्वालिटी का सही सही जानकारी हो सके

supplier से मशीन के कीमत का QUOTATION प्राप्त करे जो की आपके प्रोजेक्ट फाइनेंस के लिए जरुरी होगा

  • Raw Material: शुरू के समय में आपको कितने raw material की जरुरत होगी इसका सही सही आंकलन करे जिससे की आपका प्रोडक्शन raw material की कमी के कारण बंद न हो और जरूरत से ज्यादा raw material का स्टॉक में पैसा भी न फंसा रहे साथ ही आप कुछ raw material supplier से भी मिले और सप्लाई से सम्बंधित सभी बातो को समझ ले, जैसे की
  • Raw material का लागत
  • Raw material मिलने में लगने वाला समय
  • भुगतान की शर्ते

बहोत हद तक Raw Material की उपलब्धता और इसकी लागत पर ही आपके business की सफलता और असफलता निर्भर करेगी, इसलिए जरुरी raw material आपके फैक्ट्री location से नजदीक के शहरो में कहाँ कहाँ और किस कास्ट पर कितनी मात्रा में उपलब्ध है इस बात का सही सही विश्लेषण अनिवार्य रूप से कर ले.

  • सिविल वर्क : अब जबकि आप यह तय कर चुके है की आपको फैक्ट्री कहाँ लगानी है, कच्चे माल, तैयार माल, प्लांट एवं मशीन के लिए कितनी जगह की जरुरत होगी और इन मशीनों को किस तरह से स्थापित किया जाना है, फिर आप किसी सिविल इंजिनियर से मिलकर अपने फैक्ट्री का लेआउट तैयार करे और फैक्ट्री कंस्ट्रक्शन में लगने वाली समय सीमा और आने वाली लागत का सही आंकलन करके एक कास्ट एस्टीमेट तैयार करवा ले जो आपके प्रोजेक्ट फाइनेंस के लिए भी जरुरी है
  • कर्मचारी: आपको अलग अलग कार्यो के लिए कितने कर्मचारियो की आवश्यकता होगी, जिसमे आपको स्किल्ड,अन-स्किल्ड लेबर, सुपरवाइजर, अकाउंटेंट, सेल्समेन इत्यादि के लिए कितनी संख्या में कर्मचारी रखने होंगे एवं उनको प्रत्येक माह/वर्ष दिया जाने वाला salary की गनना करे
  • पूँजी :बिज़नेस स्टार्ट करने के लिए सबसे जरुरी कार्य पूंजी की व्यवस्था करना होता है, इसलिए अब जबकि आप सभी जानकारी इकठ्ठा कर चुके है आपको अपने बिज़नेस को स्टार्ट करने और इसे सफलता पूर्वक चलाने के लिए कब कब किस कार्य के लिए कितने पैसो की जरुरत होगी इसकी कैलकुलेशन करना अनिवार्य है. Normally हमें दो अलग अलग तरह के फण्ड की जरुरत होती है
  • स्थायी संपत्ति के लिए जिसमे जमीन, फैक्ट्री निर्माण,मशीन की लागत और फर्नीचर के कास्ट को शामिल किया जाता है
  • कार्यशील पूंजी के लिए जिसमे कच्चे माल, कर्मचारी और पॉवर की व्यवस्था के लिए भुगतान की जाने वाली राशि को शामिल किया जाता है

अतः आपको कुल कितनी पूंजी की आवश्यकता है और इसकी व्यवस्था आप किस प्रकार से करेंगे यह तय करे

आपके idea के आधार पर बिज़नस प्लान में आपने अबतक तय किया :

  • आपका प्रोडक्ट क्या होगा और इसके निर्माण की प्रक्रिया,तकनिकी जानकारिय, मार्केट डिमांड, विक्रय मूल्य, लागत मूल्य, अनुमानित लाभ का सही आंकलन
  • आपके बिज़नेस का स्वरुप क्या होगा (sole, Partneship या Company)
  • आप अपनी फैक्ट्री के लिए जमीन कहाँ और कितना लेना है
  • जमीन आपकी खुद की होगी, आप लीज पर लेंगे अथवा खरीदेंगे
  • जमीन की लागत क्या आएगी
  • फैक्ट्री निर्माण का लेआउट, निर्माण में लगने वाला समय और लागत क्या होगा
  • फैक्ट्री के लिए जरुरी मशीन आप कहाँ से खरीदेंगे एवं उसका लागत क्या होगा
  • आपको कितने raw material की जरुरत होगी और ये आप किनसे खरीदेंगे
  • जरुरी raw material के लिए आपको कितने पैसो की आवश्यकता होगी
  • आपको अपने बिज़नेस के लिए कुल कितने कर्मचारियो की जरूरत होगी
  • कर्मचारियो को हर माह/वर्ष salary भुगतान के लिए कितने पैसो की जरूरत होगी
  • आपके अपने प्रोडक्ट को कहाँ कहाँ और कैसे बेचेंगे
  • प्रत्येक माह/ वर्ष का अनुमानित sale क्या होगा
  • आपको कितनी पूंजी की आवश्यकता है, इसकी व्यवस्था आप किस तरह से करेंगे

भारत में अपना Business केसे स्टार्ट किया जा सकता है…??

हमसब अक्सर सोचते हे की हम अपना बिज़नस स्टार्ट करे, लेकिन इसे शुरू कहाँ से करे कैसे करे क्या करे इन सब बातो में उलझे रहते है साथ ही साथ

  • सही जानकारी के अभाव में
  • पूंजी की कमी के कारण और
  • बिज़नस को किस प्रकार से एक कंपनी के रूप में स्थापित किया जाय

इन सभी प्रक्रिया का ज्ञान न होने के कारण हम अपने सपनो को सही दिशा नही दे पाते है और फिर हम किसी जॉब के माध्यम से अपने जीवन की जरुरतो को पूरा करने लगते है जिससे salary के रूप में पैसे तो हम कमा लेते है लेकिन हमे इससे संतुष्टी नही मिल पाती है क्योंकि हमारे अंदर एक entrepreneur बनने की चाहत दबी होती है।

  • भारत में अपना बिज़नस किस प्रकार से स्थापित किया जा सकता है
  • सरकार के तरफ से क्या क्या सुविधा उपलब्ध है,
  • पूंजी की व्यवस्था किस प्रकार से की जा सकती है,
  • बिज़नस के लिए विभिन्न प्रकार के ऋण कैसे मिलते है
  • अपने बिज़नस को आप किस प्रकार से पंजीकृत करवा सकते है

और इसके सफल संचालन के लिए जरुरी अन्य बातो के साथ साथ टेक्स सम्बंधित सभी प्रकार की जानकारियां में यहाँ step by step आपके लिए बहुत ही साधारण भाषा में दे रहा हूँ जिससे आप आसानी से समझकर अपने सपनो को पूरा कर सकते है।

सबसे पहले आपको decision ये लेना है की आप किस प्रकार का बिज़नस करना चाहते है जो की मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग या सर्विस के रूप में हो सकता है।

  • मैन्युफैक्चरिंग: जब आप किसी प्रोडक्ट को बनाना चाहते है
  • ट्रेडिंग: जब आप किसी प्रोडक्ट में खरीद-बिक्री करना चाहते है
  • सर्विस: जबकि आप किसी प्रकार का सर्विस देकर पैसा कमाने चाहते है

जब आप यह तय कर चुके है कि आप अपना बिज़नस मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग या सर्विस में से किस क्षेत्र में जा सकते है तो फिर इसके बाद आपको प्रोडक्ट को फाइनल करना है जिसका आप व्यवसाय करने वाले है मतलब अगर आप निर्माण क्षेत्र में जाने का मन बना चुके है तो फिर आप किस प्रोडक्ट के लिए फैक्ट्री स्थापित करना चाह रहे हे, ट्रेडिंग में जाना है तो किन प्रोडक्ट्स में खरीद-बिक्री करना है और यदि सर्विस देना चाहते है तो किस प्रकार की सर्विस देने के लिए आप अपना बिज़नस स्थापित करेंगे इस बात का प्रोडक्ट्स के प्रति अपनी समझ और उससे सम्बंधित सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुवे यह तय कर ले की आप अपने बिज़नस में क्या sale करने वाले है।
अब आपको इस बात का निर्णय लेना है और समझना है की क्या आप अकेले ही अपने business को स्टार्ट करना चाहते है या आपको इसे स्टार्ट करने और सफलतापूर्वक चलाने के लिए और भी पार्टनर्स की जरुरत पड़ेगी.

  • यदि आप अकेले ही अपना business स्टार्ट करना और चलाना चाहते है तो आप sole proprietorship के रूप में अपने business स्टार्ट कर सकते है इसमे आपका बिज़नस और सभी जरूरी डॉक्यूमेंट आपके स्वयं के नाम से ही होते हे साथ ही यदि आप अपने business को बड़े आकार में करना चाहते है या सरकार के द्वारा दी जाने वाली कई तरह के लाभों का फायदा उठाना चाहते है तो आप इसे one Person Company के रूप में भी पंजीकृत करवा सकते है. जब आप अपने business को एक company के फॉर्म में चलाते हे तो ऐसी स्थिति में आपसे ज्यादा लोग जुड़ना चाहेंगे क्योंकि एक पंजीकृत कंपनी की स्थिति में आपपर लोग ज्यादा भरोसा कर सकते है अतः आपको ज्यादा recognition मिलता है
  • यदि आप ऐसा सोचते है की आप जो बिज़नस स्टार्ट करना चाहते है उसके लिए आपको कुछ और भी लोगो की जरूरत है जिनके साथ मिलकर आप इस बिज़नस को ज्यादा अच्छी तरह से चला सकते है क्योंकि मुख्य रूप से बिज़नस शुरू करने के लिए जरुरी पूंजी के अभाव में अन्य लोगो को जोड़ा जाता है साथ ही उस बिज़नस से सम्बंधित जानकारी, बनाये जाने वाले उत्पाद के विषय में तकनिकी जानकारियां और मार्केटिंग एवं अन्य जरूरी बातो की पर्याप्त ज्ञान के अभाव में कुछ ऐसे लोगो को साथ लेकर जिनसे आपसी सम्बद्ध अच्छे हो अपना बिज़नस शुरू किया जा सकता है।
    ऐसी स्थिति में आपके पास दो प्रकार के आप्शन है:-

1.Partnership: इसमे कुछ लोग साथ मिलकर आपसी सहमति से बिज़नस में सबों के द्वारा लगाया जाने वाला पूंजी और बिज़नस में होने वाले लाभ या हानि को आपस में किस तरह से बाँटना है इस बात को तय करके एक पार्टनरशिप डीड तैयार करवा सकते है जो की स्वयं या किसी वकील अथवा C.A की मदद से आसानी से बनाया जा सकता है, इसमे बिज़नस का पंजीकरण अनिवार्य नही होता जबकि जरूरी डाक्यूमेंट्स जैसे की पैनकार्ड, टिन वैट नम्बर इत्यादि पार्टनरशिप फर्म के नाम से आसानी से बन जाते है, जिसके बाद आप अपना बिज़नस साझेदारी फर्म के रूप में स्टार्ट कर सकते है, इसमे आपको इस बात का ध्यान रखना जरूरी है की बिज़नस में होने वाले नुकसान के कारण बाहरी लेनदारों के लिए ब्यक्तिगत रूप में आपका असीमित दायित्व माना जाता है जिसके कारण बिज़नस के लेनदारों को उनका पूरा भुगतान यदि पार्टनरशिप बिज़नस में आपकी हिस्सेदारी से नही हो पाता हे तो ऐसी स्थिति में आपकी ब्यक्तिगत संपत्ति को भी बेचकर उनका भुगतान किया जा सकता है जैसा की sole proprietorship में भी होता है। यदि आप अपने दायित्व को असीमित न रखकर ब्यापारिक संपत्ति तक ही सिमित रखना चाहते हे तो इसके लिए आपके पास Limited liability partnership का विकल्प है जिसके माध्यम से आप अपने ब्यक्तिगत संपत्ति को ब्यापारिक हानि से सुरक्षित रख सकते है।
2.Company: यदि आप अपने बिज़नस को बड़े पैमाने पर करना चाहते है, सरकारी सुविधाओ का बेहतर लाभ लेना चाहते हे, मार्केट में ज्यादा रिकग्निशन के साथ यदि आप चाहते है की अन्य दूसरी और बड़ी कंपनियां भी आपके साथ ब्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करे तो आप Company Act के तहत अपने ब्यापार को कंपनी के रूप में रजिस्टर करवाकर अपना बिज़नस स्टार्ट करे। जबकि आप कंपनी के रूप में बिज़नस को पंजीकृत करवाना चाहते है तो आपके पास Pvt Ltd Co या Public Ltd Co का विकल्प होता है, जबकि कुछ लोग मिलकर ही कंपनी चलाना चाहते है तो Pvt Ltd Co और यदि आप अधिक से अधिक लोगो को शेयरहोल्डर के रूप में जोड़ना चाहते हे तो फिर आपको Public Ltd Co के रूप में अपने बिज़नस को पंजीकृत करवाना चाहिए।
कंपनी पंजीकरण की प्रक्रिया कंपनी अधिनियम के तहत होती हे जिसके लिए आप किसी C.A से मिलकर इन प्रक्रियाओ को आसानी से पूरा करवा सकते है, जिसके लिए वो आपसे अपनी सामान्य फीस लेगा।

पंजीकरण(रजिस्ट्रेशन) के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारिया:- जबकि आप कोई भी बिज़नस स्टार्ट करने का निर्णय ले चुके है तो इसके लिए आपको जरूरी रजिस्ट्रेशन करवाना होता है जिसमे मुख्य रूप से  निम्नलिखित है:-

  • पैन नम्बर : पैन नम्बर किसी भी बिज़नस का सबसे जरूरी डोक्युमेंट में से एक होता है जो की आयकर से सम्बंधित है।
  • टैन नम्बर : आयकर कानून के तहत जब आप कुछ निश्चित तरह के पेमेंट करते है तो उनपर TDS काटकर सरकार के पास टैन नम्बर के माध्यम से जमा किया जाता है।
  • बैंक खाता: बिज़नस के नाम से आपका बैंक खाता भी होना जरूरी है जिसके माध्यम से पैसो का लेन देन होता है।
  • GST नम्बर : जो की अधिनियम के तहत अपने उत्पाद के बिक्रय के लिए जरूरी होता है।
  • Shop & establishment: किसी भी तरह के ब्यापारिक establishment के लिए shop & establishment का पंजीकरण अनिवार्य होता है।
  • फैक्ट्री एक्ट: यदि आप मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस के लिए फैक्ट्री लगाना चाहते है तो आपको फैक्ट्री एक्ट के तहत इसका पंजीकरण करवाना होता है।
  • Providend Fund: यदि आपके बिज़नस में 20 या इससे ज्यादा कर्मचारी है तो आपको providend fund का पंजीकरण अनिवार्य होता है।
  • SME रजिस्ट्रेशन : यदि आपका ब्यापार SME इंडस्ट्रीज के अंतर्गत आता है तो SME का रजिस्ट्रेशन जरुर करवाए, जिससे आप सरकार की तरफ से इस इंडस्ट्रीज को मिलने वाले फायदों का लाभ उठा सके.

How to approach the bank for business loan

अपने Business को setup करने उसे सफलतापूर्वक चलाने expansion और diversify करना, हर स्टेज में हमें बैंक से अपने Business के लिए loan की जरुरत होती है, existing एवं पुराने business को फाइनेंस करवाने के बहुत से रास्ते खुले है साथ ही इसके लिए बैंक से loan लेना भी काफी आसान होता है, लेकिन जब हम कोई नया business setup करने जा रहे है और साथ ही अगर वो हमारा पहला business हो तो ऐसे में अपने प्रोजेक्ट को बैंक से फाइनेंस करवाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्यूंकि हमारे पास अपने business का past का कोई भी फाइनेंसियल डाटा नहीं होता, कोई क्रेडिट रेटिंग नहीं होता जिसके आधार पर बैंक सामान्यतः business loan देते है.

हर नए Entrepreneurs के पास idea होता है, जिसके आधार पर वो अपना business स्टार्ट करने का सपना देख रहा होता है, लेकिन उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है की वो अपने business के लिए पैसा जुटाने में कामयाब हो पाता है या नहीं और अधिकत्तर ideas और अपना business स्टार्ट करने का कोशिश सिर्फ इस कारण से फ़ैल हो जाते है की उन्हें इसके लिए loan ही नहीं मिल पाता है साथ ही कई लोग तो इसलिए अपना business प्लान ही  नहीं करते क्यूंकि उन्हें लगता है की business स्टार्ट करने के लिए बहुत पैसा का जरुरत है जो की उनके पास है ही नहीं, ऐसे में ये समझना जरुरी हो जाता है की यदि आपको अपने business ideas पर यकीन है की वो सफल हो सकता है और उससे आप अच्छा लाभ कम सकते है तो उसे स्टार्ट करने और आगे बढाने के लिए हर तरह का loan बैंक आपको देगा, बस जरुरी है यह जानना की आप बैंक को loan के लिए approach कैसे करे.

वैसे केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा SME Industries, महिला Entrepreneur, Young Entrepreneur और नए स्टार्ट-अप को promote करने के लिए कई योजनाये बनायी गई है जिसमे इन्हें capital subsidy, interest subsidy, tax exemption, Credit guarantee के साथ साथ कई तरह के रजिस्ट्रेशन फीस में भी छुट दी जाती है, ऐसे सभी govt scheme को अलग से डिटेल्स में बताऊंगा, यहाँ अभी मुख्य रूप से हमे ये समझना है की कोई भी नया इंटरप्रेन्योर अपने business loan के लिए बैंक को कैसे approach करे.

सबसे पहले आप अपने ideas के आधार पर अपना Complete Business Plan करे जिसमे हर बात को समझे की आपके business के लिए

  1. जमीन कितना लगेगा, जमीन आपके पास है, आप lease पर लेंगे या खरीदेंगे और इसके लिए कितना पैसा का जरुरत है
  2. Civil कंस्ट्रक्शन का प्लान क्या होगा और इसमें कितना पैसा लगेगा
  3. कौन कौन सा Machinary का जरुरत होगा, इसे आप किनसे खरीदेंगे और इसमें कितना पैसा लगेगा
  4. Raw-Materials कौन सा प्रयोग करेंगे, इसे आप किनसे खरीदेंगे और इसके लिए आपको कितना पैसा का जरुरत होगा
  5. आपको कितने Manpower की जरुरत होगी, इन्हें आप कहाँ से hire करेंगे और इनके लिए आपको कितने पैसो की जरुरत होगी
  6. Market Research करे और यह जाने की आने वाले 4-5 सालो में आपका Expected Production और sale के आधार पर कितना Profit/Loss होगा और अपने business का financial analysis करे
  7. existing players/market demand-supply/compitition को भी समझने का कोशिश करे
  8. आपके business को setup करने और चलाने के लिए कुल कितने पैसो की जरुरत है और इसमें आपका हिस्सा और बैंक का loan कितना होगा, साथ ही बैंक के loan को आप कितने दिनों में किस तरह से वापस कर सकते हो.

उपर्युक्त जानकारी के आधार पर अपने business का “प्रोजेक्ट रिपोर्ट” तैयार करे, क्यूंकि जब भी आप किसी बैंकर से business loan के लिए बात करने को जायेंगे तो सबसे पहले आपसे यही पूछा जायेगा की आप क्या करना चाहते हो और क्या आपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार किया है, इसलिए अपने business loan के लिए बैंक जाने से पहले अपना प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार रखे, प्रोजेक्ट रिपोर्ट आप खुद से या किसी expert से बनवा सकते है लेकिन जरुरी यह है की उसमे आपके business से सम्बंधित सभी जरुरी जानकारी दिया गया हो और उन सबका आपको complete knowledge हो जिससे की जब पहली बार आप बैंक से मिले तो आप उन्हें यह भरोसा दिला सके की आप इस business को करने के लायक है और इसमें आप सफल हो सकते है और बैंक यदि आपको loan देता है तो उनका पैसा safe है.

सामान्यतः बैंक जमीन के लिए loan नहीं देते है इसलिए ज्यादा बेहतर होगा की आप loan के लिए बैंक जाने से पहले जमीन फाइनल कर ले जहाँ आपको अपना business setup करना है, जो की आपका अपना खुद का हो सकता है, आप जमीन को खरीद सकते है या लीज पर भी ले सकते है, जिससे की यदि बैंक आपके site के बारे में जानना या देखना चाहे तो देख सकता है, ऐसा करने से बैंक ज्यादा संतुष्ट हो सकता है आपके प्रोजेक्ट को फाइनेंस करने के निर्णय को लेने में.

नए entrepreneur के साथ एक और समस्या आती है की बैंक को loan के against में देने के लिए collateral security जो की प्रॉपर्टी के रूप में देना होता है और साथ ही किसी ब्यक्ति के रूप में guarantor नहीं मिल पाने के कारण भी बैंक loan देने से मना कर सकते है क्यूंकि इनके अभाव में loan secure नहीं हो पा रहा है, नए enterpreneur को ऐसी ही समस्या से बचाने और उनके द्वारा लिए जाने वाले loan को secure करने के लिए केंद्र सरकार CGTMSE scheme के तहत ट्रस्ट चला रही है जिसमे आप 2 करोड़ तक के loan को बिना किसी collateral security दिए भी ले सकते है जिसके लिए बैंको को ऐसे loan के लिए केंद्र सरकार के द्वारा guarantee दिया जाता है जिसके लिए loan लेने वाले से 1% guarantee फीस के रूप में चार्ज किया जाता है, तो अगर आपके पास collateral security एवं guarantor नहीं है तो आप बैंको से CGTMSE Scheme में अपने प्रोजेक्ट को फाइनेंस करवा सकते है.

सामान्यतः हर जगह बैंको का SME Branch खोला गया है जो की small & medium एंटरप्राइज को सपोर्ट करने के लिए खोला जाता है, अतः यदि आपका प्रोजेक्ट कास्ट 1 करोड़ से कम है तो आप किसी भी बैंक ब्रांच के मेनेजर को loan के लिए approach कर सकते है और यदि आपका प्रोजेक्ट कास्ट 1 करोड़ से ज्यादा है तो बेहतर होगा आप SME Branch में जाए.

क्यूंकि आपको अपने idea पर भरोसा है, किसी बैंक को भरोसा हो न हो आप तबतक एक के बाद दुसरे बैंक से अपने प्रोजेक्ट फाइनेंस के लिए मिलते रहे जबतक कोई बैंक आपके loan को approve न कर दे, खुद पर भरोसा रखकर पक्का इरादा के साथ कोशिश करते रहे आप जरुर सफल होंगे.

Margin Money और Collateral Security नहीं है तो Business loan कैसे मिलेगा

जब भी हम business loan के लिए बैंक को approach करेंगे तो हमे अपने business project को बैंक से फाइनेंस करवाने में दो प्रॉब्लम आएँगी.

  1. मार्जिन मनी- बैंक के नियमो के आधार पर यदि हम बैंक से business loan ले रहे है तो इसके लिए ये जरुरी है की business स्टार्ट करने वाले का भी उस business में अपना पैसा लगाया जा रहा हो, जो की कम से कम प्रोजेक्ट कास्ट का 25% होना चाहिए तब बैंक 75% loan देने के लिए तैयार होगा, जैसे आपका प्रोजेक्ट कास्ट 1 करोड़ का है तो आपको मार्जिन मनी के रूप में 25 लाख रुपया अपना लगाना होगा  जिसे मार्जिन मनी बोला जाता है तब बैंक आपको 75 लाख का loan देने के लिए तैयार हो सकता है , अगर business स्टार्ट करने वाले के पास मार्जिन money नहीं है तो ऐसी स्थिति में बैंक आपके प्रोजेक्ट को फाइनेंस नहीं करेगा.
  2. बैंक जब प्रोजेक्ट कास्ट का 75% फाइनेंस करेगा तब इसके लिए आपसे collateral security देने को बोला जायेगा, जिसमे आपको जमीन,मकान,शेयर,ज्वेलरी, फिक्स्ड डिपाजिट,इन्सुरेन्स इत्यादि का पेपर बैंक के पास गिरवी रखना होता है, साथ ही साथ किसी ऐसे ब्यक्ति को आपके द्वारा लिए जाने वाले loan के लिए guarantor भी बनाना पड़ता है जिसकी guarantee पर बैंक ये भरोसा कर सके की यदि आप loan का repayment करने में डिफ़ॉल्ट करते है तो ऐसा ब्यक्ति आपके loan को चुकाने की क्षमता रखता है.

अब यदि देखा जाय जब आप कोई नया business setup करने जा रहे है तो ज्यादातर लोगो के पास अपने business प्रोजेक्ट को बैंक से फाइनेंस करवाने के लिए ना तो अपने हिस्से का मार्जिन मनी होता है और न ही जरुरी collateral security और guarantor होता है, और इन दोनों के अभाव में न तो बैंक आपको business loan देगा न ही आपका business setup करने का सपना पूरा होगा.

इस समस्या से निकलने और अपने business idea को मूर्त रूप में लाने के लिए हमे क्या करना है, इस बात को अच्छे से समझ लीजिये..

मार्जिन मनी जो की प्रोजेक्ट कास्ट का 25% लगाना होता है, जो यदि आपके पास नहीं है तो कुछ विशेष स्थिति में बैंक मार्जिन मनी को भी फाइनेंस करता है, जैसे:-

(i) आपके पास कोई higher qualification है ( MBA,Engineering etc )

(ii) जब आपने अपने प्रोजेक्ट में काफी रिसर्च की है और अब आपको उसका काफी knowledge है

(iii) जब आप कोई नया innovative idea के तहत business स्टार्ट कर रहे है

यदि आपके पास ऐसा higher digree या knowledge नहीं है तो भी आप मार्जिन मनी के लिए SIDBI के किसी भी ब्रांच में जाकर मिल सकते है, SIDBI नए entrepreneurs को मार्जिन मनी के लिए loan देती है जिसे Risk Capital या Seed Capital बोला जाता है. इसके लिए SIDBI ने India Aspiration Fund और SMILE (SIDBI Make In India Loan for Small Enterprise) जैसी स्कीम चला रही है जिसमे नए enterpreneurs को मार्जिन मनी के लिए support किया जाता है.

मार्केट में कई venture capitalist Firm भी है जो नए business को setup करने और चलाने में अपना पैसा लगाती है, आप अपने प्रोजेक्ट के लिए ऐसे venture capitalist Firm से भी संपर्क कर सकते है.

यदि सभी कोशिशो के बाद भी आपको बैंक से मार्जिन मनी के लिए loan नहीं मिल पा रहा है तो फिर, आपके पास जितना पैसा है और आप अपने family / friends से अपने business के लिए जितना पैसा जुटा पाते है उतने ही पैसो को मार्जिन मनी का 25% हिस्सा मानते हुवे 75% बैंक loan के लिए apply करे, मतलब यदि आपके पास 10 लाख रुपया ही है तो फिर आप 1 करोड़ की जगह maximum 40 लाख तक का ही business project तैयार करे जिससे की 30 लाख का loan आपको बैंक से आसानी से मिल जायेगा, फिर धीरे धीरे अपने business को बड़ा करे.

यदि आपका प्रोजेक्ट कास्ट 25 लाख या इससे कम का है तो फिर PMEGP (Prime Minister Employment Generation Programme) में भी आप loan ले सकते है, इसमें अच्छी बातये है की इसमें आपको मार्जिन मनी सिर्फ 5-10% ही लगाना होता है और प्रोजेक्ट कास्ट का 90% तक आपको loan मिल सकता है, साथ ही इस स्कीम में 15-35 % तक का subsidy भी दिया जाता है जो की आपको अपने business को लगाने और उसे सफलता पूर्वक चलाने के लिए प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है. और आपका प्रोजेक्ट कास्ट 25 लाख से ज्यादा है तो फिर अन्य लोगो को पार्टनर के रूप जोड़कर भी आप PMEGP में अपने प्रोजेक्ट को फाइनेंस करवा सकते है.

दूसरी जो समस्या है collateral security और guarantor का तो इसके लिए भारत सरकार का एक स्कीम है CGTMSE (Credit Guarantee Fund Trust For Micro and Small Enterprises) जिसमे यदि आपका प्रोजेक्ट हर तरह से अच्छा है तो फिर 2 करोड़ तक का loan आप बिना किसी collateral security और guarantor के ले सकते है, इसके लिए आप बैंक से अपने loan को CGTMSE के तहत करने को बोल सकते है, ये स्कीम बहोत ही अच्छी स्कीम है जो की आपको collateral security और guarantor के बिना भी business loan दिला सकती है

PMEGP Loan ऑनलाइन apply करने का सही procedure

PMEGP Loan लोगो को रोजगार देने के लिए बनाया गया एक ऐसा योजना है जिसमे 18 शाल से ज्यादा की उम्र वाले कोई भी ब्यक्ति चाहे स्त्री हो या पुरुष 25 लाख तक के manufacturing यूनिट या 10 लाख तक के service यूनिट लगाने के लिए अपने नजदीक के DIC/KVIC/KVIB के ऑफिस में online apply कर सकता है, आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना है की इस स्कीम में सिर्फ और सिर्फ online आवेदन ही किया जा सकता है जिसमे आपके नजदीक के DIC/KVIC/KVIB ऑफिस में आपका एप्लीकेशन आपको सबमिट करना होता है ( इसलिए यदि कोई फ़ोन कॉल करके आपको अलग अलग तरीके से loan दिलाने का लालच देता है या फिर ये बोलता है की वो DIC ऑफिस या बैंक से बोल रहा है,, आपसे प्रोजेक्ट रिपोर्ट या मार्जिन मनी के लिए या फिर किसी भी तरह का फीस के लिए पैसो की डिमांड करता है तो निश्चित रूप से ये फ्रॉड कॉल है जो आपको loan दिलाने का लालच देकर या आपको आपके loan का sanction letter दिखाकर आपको भ्रमित करते है और आपसे प्रोजेक्ट रिपोर्ट, एप्लीकेशन submission, मार्जिन मनी या अपना कमीशन के रूप पैसे किसी बैंक अकाउंट में जमा करने को बोला जाता है, यहाँ आप इस बात का ध्यान रखिये यदि आप उनकी बातो में आकर कोई भी अमाउंट उनके द्वारा दिए गए बैंक अकाउंट में deposit करते है तो वो पैसा आपको फिर कभी मिलने वाला नहीं है )

तो सही प्रोसीजर क्या है PMEGP Loan लेने का

  • सबसे पहले आप https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal पर जाकर online आवेदन करे जिसमे आपको अपने नजदीक के DIC/KVIC/KVIB ऑफिस को ही सेलेक्ट करना है साथ ही आप जहाँ अपना यूनिट लगाना चाहते है उस area के किसी दो बैंक का डिटेल भी सेलेक्ट करना है जिसमे आपका application DIC/KVIC/KVIB ऑफिस से फोर्वोर्ड किया जायेगा.
  • online apply करने के कुछ दिनों के बाद सम्बंधित DIC/KVIC/KVIB ऑफिस में आपको इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है जिसमे आपसे आपके और आपके द्वारा लगाए जाने वाले यूनिट के बारे में पूछा जाता है यदि आप इस यूनिट को चलाने में सक्षम है तो सामान्यतः आपके आवेदन को इंटरव्यू के बाद DIC/KVIC/KVIB ऑफिस के द्वारा उस बैंक को फोर्वोर्ड कर दिया जाता है जिसे आपने आवेदन करते समय सेलेक्ट किया था. online आवेदन करने के बाद आप अपने एप्लीकेशन का प्रिंट लेकर सम्बंधित DIC/KVIC/KVIB ऑफिस में जाकर इंटरव्यू की प्रक्रिया और डेट के बारे में जानकारी ले सकते है.
  • इंटरव्यू के बाद आपका एप्लीकेशन बैंक को फोर्वोर्ड कर दिया जाता है जहाँ से आपको loan मिलेगा, फोर्वार्डिंग letter को आप PMEGP के e-portal पर भी देख सकते है ,अब आप इसका प्रिंट लेकर बैंक से जाकर अपने प्रोजेक्ट loan के लिए बात कीजिये.
  • PMEGP Loan के लिए आपको EDP ट्रेंनिंग करना जरुरी है जो की 2 सप्ताह का होता है जिसमे आपको ब्यापार चलाने का बेसिक जानकारी दिया जाता है, यह ट्रेंनिंग प्रोग्राम DIC/KVIC/KVIB/ BANK/MSME-DI/NSIC के द्वारा चलाया जाता है, ये ट्रेंनिंग आप कभी भी ले सकते है लेकिन आपको loan disburse तभी होगा जबकि आप EDP ट्रेंनिंग का सर्टिफिकेट बैंक में सबमिट कर देंगे.
  • PMEGP Loan का हर साल के लिए State-wise/Dist-wise/Bank-wise बजट होता है, मतलब अगर इस साल का बजट में पैसा बचा है तो फिर आपका loan बैंक में इंटरव्यू के बाद और बैंक के नियमो के अनुसार सम्बंधित documents जमा करने के बाद पास कर दिया जायेगा और यदि इस साल का बजट ख़त्म हो गया है तो आपको अगले साल के बजट तक इंतज़ार भी करना पड़ सकता है, लेकिन आप apply करके छोड़ दीजिये और बैंक में जाकर इसके बारे में जानकारी लेते रहे.