भारत में अपना Business केसे स्टार्ट किया जा सकता है…??

हमसब अक्सर सोचते हे की हम अपना बिज़नस स्टार्ट करे, लेकिन इसे शुरू कहाँ से करे कैसे करे क्या करे इन सब बातो में उलझे रहते है साथ ही साथ

  • सही जानकारी के अभाव में
  • पूंजी की कमी के कारण और
  • बिज़नस को किस प्रकार से एक कंपनी के रूप में स्थापित किया जाय

इन सभी प्रक्रिया का ज्ञान न होने के कारण हम अपने सपनो को सही दिशा नही दे पाते है और फिर हम किसी जॉब के माध्यम से अपने जीवन की जरुरतो को पूरा करने लगते है जिससे salary के रूप में पैसे तो हम कमा लेते है लेकिन हमे इससे संतुष्टी नही मिल पाती है क्योंकि हमारे अंदर एक entrepreneur बनने की चाहत दबी होती है।

  • भारत में अपना बिज़नस किस प्रकार से स्थापित किया जा सकता है
  • सरकार के तरफ से क्या क्या सुविधा उपलब्ध है,
  • पूंजी की व्यवस्था किस प्रकार से की जा सकती है,
  • बिज़नस के लिए विभिन्न प्रकार के ऋण कैसे मिलते है
  • अपने बिज़नस को आप किस प्रकार से पंजीकृत करवा सकते है

और इसके सफल संचालन के लिए जरुरी अन्य बातो के साथ साथ टेक्स सम्बंधित सभी प्रकार की जानकारियां में यहाँ step by step आपके लिए बहुत ही साधारण भाषा में दे रहा हूँ जिससे आप आसानी से समझकर अपने सपनो को पूरा कर सकते है।

सबसे पहले आपको decision ये लेना है की आप किस प्रकार का बिज़नस करना चाहते है जो की मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग या सर्विस के रूप में हो सकता है।

  • मैन्युफैक्चरिंग: जब आप किसी प्रोडक्ट को बनाना चाहते है
  • ट्रेडिंग: जब आप किसी प्रोडक्ट में खरीद-बिक्री करना चाहते है
  • सर्विस: जबकि आप किसी प्रकार का सर्विस देकर पैसा कमाने चाहते है

जब आप यह तय कर चुके है कि आप अपना बिज़नस मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग या सर्विस में से किस क्षेत्र में जा सकते है तो फिर इसके बाद आपको प्रोडक्ट को फाइनल करना है जिसका आप व्यवसाय करने वाले है मतलब अगर आप निर्माण क्षेत्र में जाने का मन बना चुके है तो फिर आप किस प्रोडक्ट के लिए फैक्ट्री स्थापित करना चाह रहे हे, ट्रेडिंग में जाना है तो किन प्रोडक्ट्स में खरीद-बिक्री करना है और यदि सर्विस देना चाहते है तो किस प्रकार की सर्विस देने के लिए आप अपना बिज़नस स्थापित करेंगे इस बात का प्रोडक्ट्स के प्रति अपनी समझ और उससे सम्बंधित सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुवे यह तय कर ले की आप अपने बिज़नस में क्या sale करने वाले है।
अब आपको इस बात का निर्णय लेना है और समझना है की क्या आप अकेले ही अपने business को स्टार्ट करना चाहते है या आपको इसे स्टार्ट करने और सफलतापूर्वक चलाने के लिए और भी पार्टनर्स की जरुरत पड़ेगी.

  • यदि आप अकेले ही अपना business स्टार्ट करना और चलाना चाहते है तो आप sole proprietorship के रूप में अपने business स्टार्ट कर सकते है इसमे आपका बिज़नस और सभी जरूरी डॉक्यूमेंट आपके स्वयं के नाम से ही होते हे साथ ही यदि आप अपने business को बड़े आकार में करना चाहते है या सरकार के द्वारा दी जाने वाली कई तरह के लाभों का फायदा उठाना चाहते है तो आप इसे one Person Company के रूप में भी पंजीकृत करवा सकते है. जब आप अपने business को एक company के फॉर्म में चलाते हे तो ऐसी स्थिति में आपसे ज्यादा लोग जुड़ना चाहेंगे क्योंकि एक पंजीकृत कंपनी की स्थिति में आपपर लोग ज्यादा भरोसा कर सकते है अतः आपको ज्यादा recognition मिलता है
  • यदि आप ऐसा सोचते है की आप जो बिज़नस स्टार्ट करना चाहते है उसके लिए आपको कुछ और भी लोगो की जरूरत है जिनके साथ मिलकर आप इस बिज़नस को ज्यादा अच्छी तरह से चला सकते है क्योंकि मुख्य रूप से बिज़नस शुरू करने के लिए जरुरी पूंजी के अभाव में अन्य लोगो को जोड़ा जाता है साथ ही उस बिज़नस से सम्बंधित जानकारी, बनाये जाने वाले उत्पाद के विषय में तकनिकी जानकारियां और मार्केटिंग एवं अन्य जरूरी बातो की पर्याप्त ज्ञान के अभाव में कुछ ऐसे लोगो को साथ लेकर जिनसे आपसी सम्बद्ध अच्छे हो अपना बिज़नस शुरू किया जा सकता है।
    ऐसी स्थिति में आपके पास दो प्रकार के आप्शन है:-

1.Partnership: इसमे कुछ लोग साथ मिलकर आपसी सहमति से बिज़नस में सबों के द्वारा लगाया जाने वाला पूंजी और बिज़नस में होने वाले लाभ या हानि को आपस में किस तरह से बाँटना है इस बात को तय करके एक पार्टनरशिप डीड तैयार करवा सकते है जो की स्वयं या किसी वकील अथवा C.A की मदद से आसानी से बनाया जा सकता है, इसमे बिज़नस का पंजीकरण अनिवार्य नही होता जबकि जरूरी डाक्यूमेंट्स जैसे की पैनकार्ड, टिन वैट नम्बर इत्यादि पार्टनरशिप फर्म के नाम से आसानी से बन जाते है, जिसके बाद आप अपना बिज़नस साझेदारी फर्म के रूप में स्टार्ट कर सकते है, इसमे आपको इस बात का ध्यान रखना जरूरी है की बिज़नस में होने वाले नुकसान के कारण बाहरी लेनदारों के लिए ब्यक्तिगत रूप में आपका असीमित दायित्व माना जाता है जिसके कारण बिज़नस के लेनदारों को उनका पूरा भुगतान यदि पार्टनरशिप बिज़नस में आपकी हिस्सेदारी से नही हो पाता हे तो ऐसी स्थिति में आपकी ब्यक्तिगत संपत्ति को भी बेचकर उनका भुगतान किया जा सकता है जैसा की sole proprietorship में भी होता है। यदि आप अपने दायित्व को असीमित न रखकर ब्यापारिक संपत्ति तक ही सिमित रखना चाहते हे तो इसके लिए आपके पास Limited liability partnership का विकल्प है जिसके माध्यम से आप अपने ब्यक्तिगत संपत्ति को ब्यापारिक हानि से सुरक्षित रख सकते है।
2.Company: यदि आप अपने बिज़नस को बड़े पैमाने पर करना चाहते है, सरकारी सुविधाओ का बेहतर लाभ लेना चाहते हे, मार्केट में ज्यादा रिकग्निशन के साथ यदि आप चाहते है की अन्य दूसरी और बड़ी कंपनियां भी आपके साथ ब्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करे तो आप Company Act के तहत अपने ब्यापार को कंपनी के रूप में रजिस्टर करवाकर अपना बिज़नस स्टार्ट करे। जबकि आप कंपनी के रूप में बिज़नस को पंजीकृत करवाना चाहते है तो आपके पास Pvt Ltd Co या Public Ltd Co का विकल्प होता है, जबकि कुछ लोग मिलकर ही कंपनी चलाना चाहते है तो Pvt Ltd Co और यदि आप अधिक से अधिक लोगो को शेयरहोल्डर के रूप में जोड़ना चाहते हे तो फिर आपको Public Ltd Co के रूप में अपने बिज़नस को पंजीकृत करवाना चाहिए।
कंपनी पंजीकरण की प्रक्रिया कंपनी अधिनियम के तहत होती हे जिसके लिए आप किसी C.A से मिलकर इन प्रक्रियाओ को आसानी से पूरा करवा सकते है, जिसके लिए वो आपसे अपनी सामान्य फीस लेगा।

पंजीकरण(रजिस्ट्रेशन) के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारिया:- जबकि आप कोई भी बिज़नस स्टार्ट करने का निर्णय ले चुके है तो इसके लिए आपको जरूरी रजिस्ट्रेशन करवाना होता है जिसमे मुख्य रूप से  निम्नलिखित है:-

  • पैन नम्बर : पैन नम्बर किसी भी बिज़नस का सबसे जरूरी डोक्युमेंट में से एक होता है जो की आयकर से सम्बंधित है।
  • टैन नम्बर : आयकर कानून के तहत जब आप कुछ निश्चित तरह के पेमेंट करते है तो उनपर TDS काटकर सरकार के पास टैन नम्बर के माध्यम से जमा किया जाता है।
  • बैंक खाता: बिज़नस के नाम से आपका बैंक खाता भी होना जरूरी है जिसके माध्यम से पैसो का लेन देन होता है।
  • GST नम्बर : जो की अधिनियम के तहत अपने उत्पाद के बिक्रय के लिए जरूरी होता है।
  • Shop & establishment: किसी भी तरह के ब्यापारिक establishment के लिए shop & establishment का पंजीकरण अनिवार्य होता है।
  • फैक्ट्री एक्ट: यदि आप मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस के लिए फैक्ट्री लगाना चाहते है तो आपको फैक्ट्री एक्ट के तहत इसका पंजीकरण करवाना होता है।
  • Providend Fund: यदि आपके बिज़नस में 20 या इससे ज्यादा कर्मचारी है तो आपको providend fund का पंजीकरण अनिवार्य होता है।
  • SME रजिस्ट्रेशन : यदि आपका ब्यापार SME इंडस्ट्रीज के अंतर्गत आता है तो SME का रजिस्ट्रेशन जरुर करवाए, जिससे आप सरकार की तरफ से इस इंडस्ट्रीज को मिलने वाले फायदों का लाभ उठा सके.

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