How to Prepare Detail Project Report For Spice Grinding Plant (अपने business के लिए detail project report कैसे बनाए- मशाला उद्योग के लिए)

Detail Project Report For Spice Grinding Plant

Proposal For :

Term Loan & Working Capital Assistance

Prepared By:- CMA.Radhe  Agrawal (Corporate Consultant & Project Finance Adviser)


उद्यमी सम्बन्धी विवरण:

नाम:             मेसर्स ………………………………………………

पता:              ………………………………………………………

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कार्यानुभव एवं योग्यता:  स्नातक में डिग्री लेने के पश्चात विगत 8-10 वर्षो से भी अधिक समय से भारतीय मशाला उद्योग में कार्य कर रहे है, जिसमे पिछले 5-7 वर्षो से NewZealand प्रबंधक पद पर कार्यरत है जिसके कारण उद्यमी को भारतीय बाज़ारों के साथ साथ विदेशो में प्रयोग किये जा रहे अत्याधुनिक तकनीको के साथ साथ विदेशी बाजारों में मशालो की गुणवत्ता, खपत और मांग सम्बन्धी भी अच्छी जानकारी है. सम्बंधित क्षेत्र में सफलता पूर्वक महत्वपूर्ण प्रबंधकीय पदों पर रहते हुवे ब्यापार चलाने का लम्बा अनुभव, बैंकिंग, मार्केटिंग और फाइनेंस के सम्बन्ध में अच्छी समझ हासिल करने के साथ साथ मशाला उद्योग में एक लम्बा अनुभव रहने के कारण सम्बंधित उद्योग के सभी तकनिकी और ब्यापारिक जानकारियों की एक अच्छी और विकसित समझ हासिल करने के पश्चात खुद के साथ साथ समाज के अन्य लोगो को भी अपने उद्यम के माध्यम से रोजगार देने और उनके जीवनशैली में सुधार लाने के लिए और साथ ही अच्छी क्वालिटी के उत्पादों से उद्यमिता के क्षेत्र में खुद को स्थापित करने के लिए Rajasthan Food Processing Industry Policy- 2015  के तहत अपना लघु Propritorship Manufacturing यूनिट कोटा, राजस्थान में स्थापित करके धीरे धीरे उसको विस्तृत करने का लक्ष्य है.

  1. लगाये जाने वाला उद्यम सम्बन्धी विवरण: 06 टन प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता मशाला मिल : प्रस्तावित उद्यम की क्षमता प्रतिदिन 06 टन मशालो को प्रोसेस करने की होगी, जिसमे मुख्य रूप से भारतीय रशोई में प्रयोग की जाने वाली सभी मशालो का प्रसंस्करण किया जाएगा I भारतीय पारंपरिक खाद्य वस्तुवो में मशालो का प्रयोग विशेष महत्व रखता है एवं प्रत्येक घर में इसका प्रयोग किया जाने के कारण प्रस्तावित उद्यम की मांग बाज़ार में हमेशा उच्च स्तर पर रहती है, जबकि प्रस्तावित उद्यम में घरेलु बाजारों के साथ साथ विदेशो में भी निर्यात को प्राथमिकता दी जायेगी जिसकी वजह से उद्यमी को भारत सरकार के द्वारा EXIM Policy में दिया जाने वाला आर्थिक एवं कर सम्बंधित लाभों का भी फायदा मिलेगा. इस तरह से इसकी मांग अत्यधिक है, जबकि अपेक्षाकृत प्रसंस्करण की सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित उद्यम को स्थापित करने के लिए उद्यमी वर्गो को प्रेरित किया जा रहा है और Food Processing Industry Policy के अंतर्गत पूंजीगत विनियोग एवं उद्योग स्थापित करने को लिए जाने वाले ऋणों के ब्याज पर अनुदान के रूप में प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है. अतः प्रस्तावित उद्यम सामाजिक जरुरत के साथ साथ आर्थिक रूप से भी उद्यमी वर्ग के लिए काफी लाभदायक है.

प्रस्तावित उद्यम की विशेषता: आधुनिक तकनीक की मशीन का प्रयोग एवं उच्च गुणवत्ता वाले छोटे पैक को अपने रजिस्टर्ड ब्रांड के साथ बाज़ार में उतारकर अपने उद्यम को एक मजबूत आधार देना, जिससे उपभोक्ताओ से सीधे जुड़कर अपने ब्रांड नाम के प्रति उनमे विस्वाश स्थापित करके बाज़ार में अपने उत्पादों के मांग को हमेशा बनाए रखना I

  1. उद्यम स्थापित करने के लिए भूमि की आवश्यकता:

इस उद्यम को लगाने के लिए 10000-12000 Sq feet जमीन की आवश्यकता होगी, जहाँ पानी, बिजली की पर्याप्तता हो एवं मजदूरो की आपूर्ति आसानी से मिल सके और जो मुख्य मार्ग से जुड़ा हों, अतः कोटा, राजस्थान जो की पूरी तरज से राष्ट्रीय राज्य्मार्गो से जुड़ा हुवा है, जो की राजस्थान को दिल्ली, अहमदाबाद, वड़ोदरा, मुंबई, जबलपुर, भोपाल, आगरा, ग्वालियर, इंदौर, अमृतसर जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरो से जोडती है अतः इसके लिए जरुरी सभी साधनों की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुवे सर्वोत्तम जगह है जहाँ इसे स्थापित किया जा सकता है.

  1. अलग अलग कार्यो के लिए भूमि की आवश्यकता: प्रस्तावित उद्यम में भूमि का प्रयोग इस प्रकार से किया जाएगा:-
  • Factory shed :6000 Sq Ft
  • Godown/Store :2000 Sq Ft
  • Office :200  Sq ft
  • Guard room :100 Sq ft
  • Others : 700 Sq ft
  • Open space :3000 Sq ft
  • TOTAL :12000 Sq ft

आवश्यक भूमि एवं भवन को पट्टे पर लिया जाएगा जिसमे मशीनों की स्थापना एवं अन्य विशेष जरूरतों को देखते हुवे civil construction करवाया जाएगा.

  1. कच्चा माल: कच्चा माल के रूप में साबुत मशालो का प्रयोग किया जाएगा, जो की राजस्थान की विशेष पहचान है और भारतीय कृषि का मुख्य उत्पाद होने के कारण प्रचुर मात्रा में बाज़ार में उपलब्ध है, जिसे जयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा और भिवंडी से आवश्यकता के अनुसार ख़रीदा जा सकता है, चूँकि उद्यमी विगत 8-10 वर्षो से सम्बंधित क्षेत्र में Manufacturing के साथ साथ थोक व्यापार में कार्यरत है, उद्यमी को आवश्यक कच्चे माल के सम्बन्ध में उपलब्ध अलग अलग बाजारों का पूर्णतः जानकारी होने के साथ साथ इसकी गुणवत्ता एवं वास्तविक बाज़ार मूल्य का विशेष अनुभव है अतः कच्चे माल का 07 दिनों का स्टॉक रखकर उत्पादन प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के लगातार चलाया जा सकता है I
  2. तकनीकी वाणिज्यिक व्यवहार्यता : प्रस्तावित उद्यम में प्रयोग किया जाने वाला मशीन एवं manufacturing की प्रक्रिया वर्तमान में उपलब्ध नवीनतम तकनीक पर आधारित है, अतः प्रस्तावित उद्यम के लिए लगाई जाने वाली मशीनों का उद्योग में बिलकुल नवीन तकनीक का होने के कारण तकनीक परिवर्तन से आने वाला रिस्क न्यूनतम है एवं वाणिज्यिक दृष्टी से पूर्णतः व्यावहारिक है.

मशीन सप्लायर: प्रस्तावित उद्यम के लिए आवश्यक प्लांट एवं मशीन निर्माण का कार्य मुंबई और नॉएडा, जयपुर में मुख्य रूप से होता है जो की एक ही तरह के तकनीक पर आधारित मशीन का निर्माण करते है जिसमे semi automatic और fully automatic मशीन अलग अलग उत्पादन क्षमता आधारित मशीन शामिल है अतः उद्यमी अपनी आवश्यकता के अनुसार इन मशीन निर्माताओ के पास उपलब्ध मशीनों में से क्रय कर सकता है अथवा मशीन निर्माता उद्यमी की जरुरत के अनुकूल भी मशीनों का निर्माण करते है अर्थात सर्वोत्तम मशीनों के आपूर्तिकर्ता पर्याप्त मात्रा में होने के कारण प्लांट एवं मशीन की लागत भी अपेक्षाकृत एक सामान ही है.

  1. उत्पादन क्षमता: प्रस्तावित उद्योग के लिए लगाईं जाने वाली मशीन की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 8 घंटे के एक शिफ्ट में 06 टन कच्चे सामग्री को प्रोसेस करके तैयार माल में परिवर्तित करने की होगी, प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में पूर्ण क्षमता का क्रमशः 70% एवं 80% तत्पश्चात के वर्षो में 90% का उत्पादन होना अनुमानित है. इस तरह से वर्ष में 300 दिन कार्यदिवस मानते हुवे प्रथम, द्वितीय एवं बाद के वर्षो में क्रमशः 70%, 80% एवं 90% के अनुमान से 1260 टन, 1440 टन और उसके बाद 1620 टन माल तैयार होगा.
  2. प्रदुषण नियंत्रण: प्रस्तावित उद्यम एवं उद्योग में प्रयोग किया जाने वाला प्लांट एवं मशीनरी किसी भी तरह के प्रदुषण का उत्सर्जन नहीं करता है अतः ये उद्यम सरकार की प्रदुषण सम्बन्धी सभी मानको के अंतर्गत है, साथ ही प्रस्तावित उद्यम में waste goods की मात्रा शून्य होगा. प्रदुषण नियंत्रण नियमो के आधार पर राजस्थान प्रदुषण बोर्ड में प्रस्तावित उद्यम स्थापित करने हेतु आवेदन भी दिया जा चूका है.
  3. अपशिस्ट निबटान की व्यवस्था एवं प्रक्रिया: यद्यपि प्रस्तावित उद्यम अपशिस्ट शून्य है, तथापि अपशिष्ट निबटान व्यवस्था की आवश्यकता मूल रूप से नहीं है, परन्तु फिर भी waste मैनेजमेंट की उचित व्यवस्था नियमो और मानको के आधार पर किया जायेगा.
  4. निर्माण प्रक्रिया प्रवाह चार्ट: प्रस्तावित उत्पाद की निर्माण प्रक्रिया कुछ आसान से steps में पूरी हो जाती है जो इस प्रकार से है.

उत्पादन प्रक्रिया कच्चे मशालो को सफाई करने से शुरू होती है जिसमे मशालो में से कंकर, मिटटी या अन्य कचरों को अलग किया जाता है और साफ़ किये हुवे मशालो को आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ाया जाता है, जिसे मशीनों के द्वारा पाउडर बनाया जाता है, इसके बाद तैयार पाउडर को ठंडा किया जाता है और चलनी किया जाता है जिससे छिल्को की मात्र को अलग किया जा सके I पाउडर मशाला तैयार होने के बाद इसकी गुणवत्ता की जांच की जाती है एवं उच्च गुणवत्ता वाले मशालो को ही आगे की प्रक्रिया में भेजा जाता है,जिसके बाद ये पूरी तरह से Pakeging के लिए तैयार हो जाते है , तत्पश्चात अलग अलग quantity के bags में भरकर इन्हें स्टोर किया जाता है एवं खरीददार को भेज दिया जाता है.

निर्माण की प्रक्रिया सहज और आसान होने के कारण निर्माण कार्यो में अपेक्षाकृत रूकावटे कम आएगी और अधिकत्तम उत्पादन क्षमता को प्राप्त किया जा सकता है जो की प्रस्तावित उद्योग की सफलता सुनिश्चित करता है. इसमें प्रयोग किया जाने वाला मशीनों को सप्लायर के द्वारा फैक्ट्री में स्थापित किया जायेगा, मशीनों को फैक्ट्री में तय जगहों पर सामान्य प्रक्रिया से बहुत ही आसानी से स्थापित किया जा सकता है.

  1. अधारभूत साधनों की व्यवस्था :
  • बिजली का कनेक्शन 50 KW: प्रस्तावित उद्यम के लिए 50 KW बिजली के connected load के कनेक्शन की आवश्यकता होगी, जिसकी व्यवस्था राजस्थान राज्य बिजली बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा, साथ ही उत्पादन प्रक्रिया को बिना रुकावट चलाने के लिए 50kw डिजल जनरेटर भी लगाया जाएगा.
  • पानी की व्यवस्था 10000 Ltr/Day : उद्यम में अलग अलग कार्यो के लिए कूल मिलकर अनुमानित 10000 Ltr./Day पानी की आवश्यकता होगी, जिसकी व्यवस्था राज्य जल बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा साथ ही बोरिंग के माध्यम से भी पानी की व्यवस्था किया जाना नियोजित है.
  • मानव संसाधन की व्यवस्था : प्रस्तावित उद्यम के लिए प्रबंधक, कुशल, अर्ध-कुशल एवं अकुशल और गार्ड के लिए कुल मिलाकर 15 लोगो की आवश्यकता होगी जिसे लोकल area से वेतन आधारित भर्ती किया जायेगा.
  1. विपणन रणनीति: बाज़ार में प्रस्तावित उत्पाद की वर्तमान मांग और भविष्य की अनुमानित मांग अपेक्षाकृत अधिक है जिसकी पूर्ति सामान्यतः राजस्थान के उद्यमी वर्गो के द्वारा नहीं कर पाने के कारण अत्यधिक मात्रा में महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश से उत्तरप्रदेश में उच्च कीमत पर मंगाया जाता है, इस कारण प्रस्तावित उद्यम में होने वाला 100% उत्पादन बिलकुल आसानी से राजस्थान के अन्दर ही अग्रिम भुगतान एवं आर्डर बुकिंग के माध्यम से बिक्रय किया जा सकता है, अर्थात उत्पाद की मांग अधिक है और पूर्ति बेहद कम जिसके कारण कुल उत्पादन को आसानी से बेचा जा सकता है. एवं वर्तमान में प्रस्तावित उत्पाद की मांग अत्यधिक होने के कारन विपणन रणनीति की कोई आवश्यकता नहीं होने के बावजूद बाज़ार में अपनी मजबूत स्थिति को बनाए रखने और भविष्य में उत्पन्न होने वाले अनुमानित प्रतिस्पर्द्धा को देखते हुवे एक कुशल विपणन रणनीति बनाया जायेगा जिसमे मुख्या रूप से राजस्थान के प्रत्येक शहरो में डीलरशिप के माध्यम से एजेंट बनाकर अधारभूत तरीके से ब्यापार का बिस्तार किया जायेगा.
  2. SWOT विश्लेषण: उद्यमी के द्वारा आत्मनिर्भरता और तेजी से बदलते हुवे उद्यम अनुकूल परिवेश का लाभ लेने और स्वयं के साथ साथ समाज के लोगो को रोजगार और अच्छी जिंदगी देना प्राथमिक लक्ष्य है, ऐसे में अपने अन्दर के ब्याक्तिगत गुण, कौशल क्षमता और अपने कार्यानुभव का अवलोकन भी जरुरी हो जाता है ताकि भविष्य को सही तरीके से समझकर अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सके.

इस विश्लेषण को क्रमवार निम्न प्रकार से अवलोकन किया गया है.

S-strength: प्रस्तावित उत्पाद का बाज़ार मांग उद्यम की सफलता का सबसे बड़ा कारण होगा, साथ ही उद्यमी का सम्बंधित क्षेत्र में एक लम्बे समय से मशाला ब्यापार को सफलता पूर्वक चलाने का अनुभव है, जिससे उद्यमी की कौशल क्षमता का अवलोकन उसके उच्च शिक्षा और लम्बे कार्यानुभव के आधार पर की जा सकती है जिसके कारण उद्यमी के पास बेहतर आर्थिक समझ और तकनिकी ज्ञान के साथ साथ किसी उद्यम को स्थापित करने और सफलतापूर्वक चलाने के लिए जरुरी प्रबंधकीय क्षमता उद्यमी की strength का परिचायक है.

W-weaknesses: चूँकि उद्यमी को व्यावहारिक तौर पर Manufacturing Unit चलाने का अनुभव नहीं है और प्रस्तावित उद्यम के माध्यम से इस क्षेत्र में अपना कदम रख रहे है, जो की वर्तमान के प्रतिस्प्रद्धात्मक ब्यापारिक स्थिति में खुद को स्थापित करने के लिए Manufacturing क्षेत्र में अपने अनुभव की कमियों को दूर करना होगा.

O-opportunities: वर्तमान में उद्यम अनुकूल परिवेश का होना, जहाँ भारत सरकार के द्वारा Make IN India जैसी योजनाओं से Manufacturing क्षेत्र को बढ़ावा देकर उद्यम की स्थापना को आसान बनाया गया है, CGTMSE के तहत उद्यम स्थापित करने हेतु colleteral free loan की सुविधाए मुहैया करवाई जा रही है, वही राजस्थान राज्य सरकार के द्वारा नयी फ़ूड प्रोसेसिंग पालिसी-2015 के माध्यम से पंजीकरण को आसान बनाना और इस क्षेत्र में उद्यम की स्थापना के लिए हर संभव मदद के साथ साथ प्रोत्साहन स्वरुप ऋण subsidy और ब्याज subsidy दिया जाना नए उद्यमी के लिए एक सुनेहरा अवसर है. साथ ही उद्यमी का सम्बंधित क्षेत्र में वर्षो से प्रबंधकीय पद पर काम किया जाना भी उनके लिए Manufacturing क्षेत्र में कदम रखने के लिए एक अच्छा अवसर के रूप में देखा जा सकता है.

T-threats: प्रस्तावित उद्यम को लेकर वर्तमान में किसी तरह की कोई बाधायें नहीं है, लेकिन भविष्य में आने वाले प्रतिस्प्रद्धा को देखते हुवे कुशल विपणन रणनीति की आवश्यकता है.

  1. कार्यान्वयन अनुसूची: उत्पादन चालु करने से पूर्व सभी अलग अलग प्रक्रियावो में लगने वाला अनुमानित समय इस प्रकार से है जिसमे परिस्थिति के आधार पर समायोजन किया जा सकता है
  • Selection of Site                                                                             Done
  • Land Acquisition                                                                           Done
  • SSI Registration                                                                             Done
  • Pollution Clearance                                                                     Applied
  • Other required registration                                                     1 Month
  • Availability of Finance                                                               1 Month
  • Civil work                                                                                         1 Month
  • Machinery Commissioning & Trial Run etc                       1Month

कार्य साथ साथ चलने के कारण अनुमानतः 3 महीने में उत्पादन स्टार्ट कर दिया जायेगा.

  1. महत्वपूर्ण Assumptions:
  • प्रस्तावित उद्यम प्रतिदिन 8 घंटे के दो शिफ्ट में काम करेगी, एवं शाल में 300 दिन काम चलेगा.
  • 1st, 2nd  3rd  के शालो में क्रमश: ये माना गया है की 70%,  80%, 90% उत्पादन क्षमता को प्राप्त किया जाएगा.
  • पूंजीगत व्यय पर ब्याज की दर 12% एवं कार्यशील पूंजी पर 14% की दर से ब्याज अनुमानित माना गया है
  • कुल प्रोजेक्ट कास्ट का 20% मार्जिन मनी के रूप में उद्यमी के द्वारा विनियोग किया जायेगा एवं 80% बैंक ऋण के माध्यम से विनियोग किया जाएगा
  • बैंक ऋणों को 5 वर्षो में पुनर्भुगतान किया जाएगा
  • उद्यम के लिए जरुरी पॉवर के लिए 6 रुपया प्रति यूनिट की दर से लागत माना गया है, एवं जनरेटर के लिए लगने वाला diesal का लागत 60 रुपया प्रति लिटिर माना गया है.
  • विक्रय सम्बंधित खर्च को 0.5% विक्रय के ऊपर माना गया है.
  • Repair & Maintanance के लिए भवन पर 2% और मशीन पर 3% की दर से माना गया है.