मैनुफैक्चरिंग यूनिट के लिए जरूरी रजिस्ट्रेशन और NOC

मैनुफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए आपको जरूरत है;
– जमीन:जहाँ आप अपना फैक्ट्री लगा सके, जमीन आपका खुद का नही है तो फिर आप खरीद सकते है या फिर काम से कम 3 शाल के लिए लीज पर ले सकते है, राज्य सरकार औद्योगिक क्षेत्र में भी आप उद्योग लगाने के लिए जमीन लीज पर ले सकते है।
– फिर इसमें आपको अपने यूनिट के लिए जरूरी मशीन के सप्लायर के द्वारा बताए गए निर्देश के अनुसार सिविल कंस्ट्रक्शन करवाना है जिसके लिए सिविल इंजीनियर से आप सिविल डिज़ाइन और कॉस्ट एस्टीमेट तैयार करवाये।
– 5-7 मशीन सप्लायर से मिलकर जरूरी मशीन का सिलेक्शन करे और साथ ही मशीन का quotation भी जरूर ले लीजिए। मशीन के सप्लायर से आपको जरूरी पॉवर और मैन्यूफैक्चरिंग प्रॉसेस का पूरा टेक्निकल जानकारी के साथ साथ प्रोडक्ट को बनाने की कुल लागत और बाज़ार में डिमांड के संबंध में भी जानकारी मिलेगी, पहले से उनके द्वारा लगाई गई यूनिट में जाकर भी प्रैक्टिकल रूप से चालू यूनिट देखकर पूरा प्रोसेस को समझ सकते है।
– Raw Material के सप्लायर से मिलकर तय करे कि आपको जरूरी कच्चा माल का कॉस्ट क्या आएगा और पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल बाजार में हमेशा उपलब्ध है या नही, ऐसा न हो अधिक डिमांड के वक़्त आपको कच्चा माल न मिले और आप लिए गए आर्डर को इसके अभाव में पूरा न कर सके। बहुत से यूनिट सिर्फ कच्चे माल के अभाव में या उच्च लागत के कारण बंद हो जाता है, इस कारण आपको कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता के साथ साथ उसके लागत का सही विश्लेषण आपकी सफलता को तय करेगा। कच्चे माल का quotation भी जरूर ले लीजिए।

अब आप अपने यूनिट के लिए Total Investment=Land+Civil Construrtion+Plant & Machine+Raw Material & employee Salary for one cycle period) कैलकुलेट कीजिये, जिससे आपको पता चलेगा कि आपको आखिर कितने पैसो की जरूरत है अपने यूनिट को मूर्त रूप देने में।
Total Project Cost का आपको 25-30% पैसा खुद का लगाना है जो कि आप अपने फैमिली या फ्रेंड्स से ले सकते है या फिर पार्ट्नर को शामिल कर सकते है जो इन्वेस्टमेंट कर सके या फिर आप venture capital firm से भी अपने प्रोजेक्ट में equity investment के लिए संपर्क कर सकते है।
70-75% के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर बैंक लोन के लिए अप्लाई कर सकते है।

Registration & NOC;
– उद्योग आधार MSME (udyogaadhaar.gov.in)
– GST (https://www.gst.gov.in)
– बैंक एकाउंट
– Trade लाइसेंस ( Local Muncipal कारपोरेशन)
– Pollution NOC (State pollution Board)
-Power Connection(State Electricity Board)
– Factory Registration (Labour Commissioner office)
– FSSAI For food products(fssai.gov.in)
– Company Registration (mca.gov.in)

State Govt के single window e-portal पर जाकर किसी भी यूनिट के लिए जरूरी सभी Registration & NOC के लिए CAF(Combined application form) के द्वारा भी अप्लाई किया जा सकता है जो कि काफी आसान है।

डाक्यूमेंट्स जो बैंक लोन के लिए जरूरी है;
– डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट
– जमीन का पेपर या लीज़ एग्रीमेंट
– मशीन का quotation और सप्लायर डिटेल
– Raw मटेरियल का quotation और सप्लायर डिटेल
-I.Tax Return तीन साल का(यदि है)
-आधार नंबर & पैन नंबर
– NOC फ्रॉम पॉल्युशन बोर्ड या एप्लाइड कॉपी
– एप्लाइड कॉपी फ़ॉर पॉवर कनेक्शन
– गारंटर और कोलैटरल सिक्योरिटी का डिटेल
बैंक लोन आप बैंक में जाकर या बैंक के पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते है।
25 लाख तक का प्रोजेक्ट के लिए PMEGP के पोर्टल पर https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal अप्लाई किया जा सकता है।
इसके अलावा https://www.standupmitra.in के पोर्टल पर भी आप 10 लाख से 1 करोड़ तक के प्रोजेक्ट के लिए भी लोन अप्लाई कर सकते है जिसमे न्यूनतम 51% हिस्सा सामान्य महिला/अनुसूचित जाति-जनजाति उद्यमी का होना अनिवार्य है।

Manufacturing Business स्टार्ट करने की step by step जानकारी

कोई भी मैन्युफैक्चरिंग business स्टार्ट करने के लिए जरूरी है एक idea, एक ऐसा idea जो आपको सफलता की ऊंचाइयो तक ले जा सकता हो जिस idea को मूर्त रूप में लाने के लिए आप ब्याकुल हो चुके हो क्योंकि किसी भी सफल business की शुरुवात एक अच्छे idea से ही होती है जिसके आधार पर आप दुनिया में अपने प्रोडक्ट को sale करना चाहते हो, अतः सबसे पहले आपके पास एक idea होना चाहिए जिसके आधार पर आपका प्लान बिलकुल क्लियर हो की आप किस चीज़ का business करना चाहते है और आप क्या manufacturing करना चाहते है उस product के सम्बन्ध में आधारभूत जानकारी आपके पास होनी चाहिए जैसे:

  • आपके प्रोडक्ट का मार्केट में डिमांड कितना है
  • इस प्रोडक्ट का कास्टिंग और बाज़ार मूल्य कितना है
  • प्रोडक्ट को बनाने की प्रक्रिया क्या है
  • इसके लिए प्रयोग किया जाने वाला कच्चे माल की उपलब्धता
  • बाज़ार में इससे सम्बंधित अन्य निर्माता एवं प्रतिस्प्रद्धा का सही आंकलन
  • जबकि आप अपना business idea एवं तैयार किया जाने वाला प्रोडक्ट तय कर चुके है तो फिर आपको अपने business का स्वरुप के सम्बन्ध में ये निर्णय लेना है की आप sole proprietorship/ one Person Company/ Partnership/Limited Liability Partnership/ Pvt Ltd Co./Public Limited Co में से किस स्वरुप में अपना business स्टार्ट करना चाहते है जो स्वरुप आपके लिए उचित हो उसके लिए जरुरी पंजीकरण करवाए.
  • location तय करे जहाँ आप अपना फैक्ट्री लगा सकते हो, इसके लिए आपको जमीन की आवश्यकता होगी जो आपकी खुद की हो सकती है, जिसे आप लीज़ पर ले सकते है या जिसे आप फैक्ट्री लगाने के लिए खरीद सकते है, ध्यान रखे जहाँ आप अपना फैक्ट्री लगाना चाहते है वहां आपको
  • फैक्ट्री स्थापित करने के लिए पर्याप्त जमीन मिल सके
  • मजदूर आसानी से और अपेक्षाकृत कम लागत पर मिल सके
  • बिजली और पानी की उचित व्यवस्था हो
  • कच्चा माल लाने और तैयार माल को बाज़ार तक आसानी से और कम से कम परिवहन लागत पर पहुँचाया जा सके
  • स्थानीय माहौल अपेक्षाकृत शांतिमय हो जिससे की फैक्ट्री के संचालन में कोई रुकावट ना आये और सभी सामान, मशीन एवं कर्मचारी सुरक्षित रहे

सामान्यतः हर राज्य सरकार के द्वारा उद्योगों के विकाश के लिए कई जिलो में औद्योगिक क्षेत्र (Industrial area) बनाये जाते है जिन क्षेत्रो में उद्योग की स्थापना और इसके सफल संचालन के लिए जरुरी सभी आधारभूत सुविधाओ को ध्यान में रखा जाता है और लम्बी अवधि के पट्टे पर अनुबंध के तहत उद्योग लगाने वालो को दिया जाता है साथ ही इन क्षेत्रो में फैक्ट्री लगाने के लिए बिजली, पानी का कनेक्शन हो या municipality एवं pollution control board द्वारा दिया जाने वाला अप्रूवल हो अपेक्षाकृत ज्यादा आसानी से मिल सकता है अर्थात किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री लगाना सही निर्णय साबित हो सकता है

  • Market Research : अपना business area भी तय करे जहाँ-जहाँ आप अपने प्रोडक्ट्स को बेच सकते है अर्थात आपके प्रोडक्ट के लिए उपलब्ध बाज़ार को समझे और वहां अपने प्रोडक्ट से सम्बंधित कुछ जरुरी मार्केट रिसर्च कर ले जैसे:
  • आपके प्रोडक्ट का अनुमानित sale कितना होगा
  • अपनी market strategy तय करे
  • अपने customer तक पहुँचने के लिए जरुरी कदम तय करे
  • प्रतिस्प्रद्धा और बेहतर क्वालिटी को ध्यान में रखते हुवे sale price तय करे
  • इस बात का भी विश्लेषण अवश्य कर ले कि बाज़ार में कितने दिनों के लिए आपका पैसा फसेगा अर्थात आपके द्वारा जो प्रोडक्ट इन मार्केट में बेचा जाना है वो अन्य सप्लायर के द्वारा नकद या उधार में बेचा जा रहा है यदि उधार में बिक रहा है तो औसतन कितने दिनों के बाद आपको पैसा मिल सकता है साथ ही कोशिश कीजिये ये जानने का की सामान्यतः कितना प्रतिशत उधार में दिया जाने वाला पैसा डूब जाता है जिससे की आप अपने business में होने वाले अनुमानित लाभ और जरुरी पूंजी का सही प्रकार से आंकलन कर सके
  • सभी प्रकार के खर्चो के आधार पर अपने लागत का सही आंकलन करे
  • उपर्युक्त सभी जानकारी के आधार पर अपना अनुमानित लाभ एवं लाभ का प्रतिशत क्या होगा इसकी गनना करे
  • Plant & Machinery Suppliers से मिले: उन suppliers की एक लिस्ट तैयार करे जो आपके प्रोडक्ट को बनाने के लिए जरुरी machinery बनाते है और फिर एक एक करके उनमे से कुछ प्रमुख supplier से मिलकर machine से सम्बंधित सभी बातो को जाने जैसे:
  • supplier के द्वारा बनाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के manual/semi automatic/fully automatic machines
  • इन मशीनों को चलाने के लिए कितनी बिजली की आवश्यकता होगी
  • इन मशीनों को चलाने के लिए कितने मजदूरों की आवश्यकता होगी
  • इन मशीनों के द्वारा प्रतिदिन कितनी संख्या में तैयार माल बनाया जा सकता है
  • मशीन की life कितने वर्षो की होगी
  • मशीन का ऑपरेटिंग कास्ट क्या होगा

प्रत्येक मशीन की कीमत,मशीन की life और इसके ऑपरेटिंग कास्ट के साथ इसके द्वारा प्रतिदिन तैयार किये जाने वाले माल की संख्या के आधार पर आप ये तय कर सकते है की आपके लिए कौन सा मशीन सबसे अच्छा हो सकता है, यदि मशीन की कीमत अपेक्षाकृत ज्यादा है तो आप अन्य देशो में भी इसकी कीमत और तकनीक के सम्बन्ध में जानकारी हासील करे (वर्तमान में इन्टरनेट के माध्यम से देश और विदेशो के suppliers के बारे में आसानी से जानकारी इकठ्ठा करके उनसे बात किया जा सकता है )

मशीन का चुनाव करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखे की ये लेटेस्ट तकनीक पर आधारित हो जिससे की इसके द्वारा बनायीं जाने वाली प्रोडक्ट की लगत कम हो और जल्द ही आपको नयी तकनीक आने की वजह से मशीन को बदलने की जरुरत न पड़े

जब आप suppliers से मशीन के सम्बन्ध में मिलने के लिए जाय तो उनकी मशीन के द्वारा कच्चे माल से तैयार माल बनाने की प्रक्रिया को भी अच्छी तरह से समझने की कोशिश करे, साथ ही साथ इस प्रक्रिया के हर स्टेज पर लगने वाले लगत को बारीकी से समझ ले जिससे आप अपेक्षाकृत बेहतर अनुमानित लाभ-हानि का आंकलन कर सकेंगे, आप जिस प्रोडक्ट को बनाना चाहते है उसके लिए जरूरी मशीन के suppliers के पास आपके प्रोडक्ट से सम्बंधित सभी जानकारिय होती है जैसे की उसका बाज़ार डिमांड, बाज़ार में उपलब्ध प्रतिस्प्रद्धा, manufacturing प्रोसेस, कास्ट price और competitive मार्केट में मिलने वाला sale price, तकनिकी जानकारी , कच्चे माल के suppliers, अच्छी क्वालिटी और कम कीमत पर कच्चे माल की उपलब्धता, बैंक से आपके प्रोजेक्ट फाइनेंस करवाने की प्रक्रिया इत्यादि इन सभी बातो का मशीन के suppliers के पास अच्छी जानकारी होती है इस कारण कम से कम 4-5 supplier से मिले और आपके लिए जरुरी सभी बातो को अच्छी तरह से समझकर नोट कर ले इससे आपको अपने द्वारा स्टार्ट किये जाने वाले business की समझ अपेक्षाकृत और ज्यादा बढ़ जाएगी और आप हर जगह सही निर्णय ले सकेंगे. यदि आप चाहे तो उनके द्वारा पूर्व में स्थापित अन्य customers के पास चलती हुई मशीन को भी जाकर देख सकते है जिससे की आपको उनकी मशीन और इसके द्वारा तैयार किये जाने वाले प्रोडक्ट्स की क्वालिटी का सही सही जानकारी हो सके

supplier से मशीन के कीमत का QUOTATION प्राप्त करे जो की आपके प्रोजेक्ट फाइनेंस के लिए जरुरी होगा

  • Raw Material: शुरू के समय में आपको कितने raw material की जरुरत होगी इसका सही सही आंकलन करे जिससे की आपका प्रोडक्शन raw material की कमी के कारण बंद न हो और जरूरत से ज्यादा raw material का स्टॉक में पैसा भी न फंसा रहे साथ ही आप कुछ raw material supplier से भी मिले और सप्लाई से सम्बंधित सभी बातो को समझ ले, जैसे की
  • Raw material का लागत
  • Raw material मिलने में लगने वाला समय
  • भुगतान की शर्ते

बहोत हद तक Raw Material की उपलब्धता और इसकी लागत पर ही आपके business की सफलता और असफलता निर्भर करेगी, इसलिए जरुरी raw material आपके फैक्ट्री location से नजदीक के शहरो में कहाँ कहाँ और किस कास्ट पर कितनी मात्रा में उपलब्ध है इस बात का सही सही विश्लेषण अनिवार्य रूप से कर ले.

  • सिविल वर्क : अब जबकि आप यह तय कर चुके है की आपको फैक्ट्री कहाँ लगानी है, कच्चे माल, तैयार माल, प्लांट एवं मशीन के लिए कितनी जगह की जरुरत होगी और इन मशीनों को किस तरह से स्थापित किया जाना है, फिर आप किसी सिविल इंजिनियर से मिलकर अपने फैक्ट्री का लेआउट तैयार करे और फैक्ट्री कंस्ट्रक्शन में लगने वाली समय सीमा और आने वाली लागत का सही आंकलन करके एक कास्ट एस्टीमेट तैयार करवा ले जो आपके प्रोजेक्ट फाइनेंस के लिए भी जरुरी है
  • कर्मचारी: आपको अलग अलग कार्यो के लिए कितने कर्मचारियो की आवश्यकता होगी, जिसमे आपको स्किल्ड,अन-स्किल्ड लेबर, सुपरवाइजर, अकाउंटेंट, सेल्समेन इत्यादि के लिए कितनी संख्या में कर्मचारी रखने होंगे एवं उनको प्रत्येक माह/वर्ष दिया जाने वाला salary की गनना करे
  • पूँजी :बिज़नेस स्टार्ट करने के लिए सबसे जरुरी कार्य पूंजी की व्यवस्था करना होता है, इसलिए अब जबकि आप सभी जानकारी इकठ्ठा कर चुके है आपको अपने बिज़नेस को स्टार्ट करने और इसे सफलता पूर्वक चलाने के लिए कब कब किस कार्य के लिए कितने पैसो की जरुरत होगी इसकी कैलकुलेशन करना अनिवार्य है. Normally हमें दो अलग अलग तरह के फण्ड की जरुरत होती है
  • स्थायी संपत्ति के लिए जिसमे जमीन, फैक्ट्री निर्माण,मशीन की लागत और फर्नीचर के कास्ट को शामिल किया जाता है
  • कार्यशील पूंजी के लिए जिसमे कच्चे माल, कर्मचारी और पॉवर की व्यवस्था के लिए भुगतान की जाने वाली राशि को शामिल किया जाता है

अतः आपको कुल कितनी पूंजी की आवश्यकता है और इसकी व्यवस्था आप किस प्रकार से करेंगे यह तय करे

आपके idea के आधार पर बिज़नस प्लान में आपने अबतक तय किया :

  • आपका प्रोडक्ट क्या होगा और इसके निर्माण की प्रक्रिया,तकनिकी जानकारिय, मार्केट डिमांड, विक्रय मूल्य, लागत मूल्य, अनुमानित लाभ का सही आंकलन
  • आपके बिज़नेस का स्वरुप क्या होगा (sole, Partneship या Company)
  • आप अपनी फैक्ट्री के लिए जमीन कहाँ और कितना लेना है
  • जमीन आपकी खुद की होगी, आप लीज पर लेंगे अथवा खरीदेंगे
  • जमीन की लागत क्या आएगी
  • फैक्ट्री निर्माण का लेआउट, निर्माण में लगने वाला समय और लागत क्या होगा
  • फैक्ट्री के लिए जरुरी मशीन आप कहाँ से खरीदेंगे एवं उसका लागत क्या होगा
  • आपको कितने raw material की जरुरत होगी और ये आप किनसे खरीदेंगे
  • जरुरी raw material के लिए आपको कितने पैसो की आवश्यकता होगी
  • आपको अपने बिज़नेस के लिए कुल कितने कर्मचारियो की जरूरत होगी
  • कर्मचारियो को हर माह/वर्ष salary भुगतान के लिए कितने पैसो की जरूरत होगी
  • आपके अपने प्रोडक्ट को कहाँ कहाँ और कैसे बेचेंगे
  • प्रत्येक माह/ वर्ष का अनुमानित sale क्या होगा
  • आपको कितनी पूंजी की आवश्यकता है, इसकी व्यवस्था आप किस तरह से करेंगे

भारत में अपना Business केसे स्टार्ट किया जा सकता है…??

हमसब अक्सर सोचते हे की हम अपना बिज़नस स्टार्ट करे, लेकिन इसे शुरू कहाँ से करे कैसे करे क्या करे इन सब बातो में उलझे रहते है साथ ही साथ

  • सही जानकारी के अभाव में
  • पूंजी की कमी के कारण और
  • बिज़नस को किस प्रकार से एक कंपनी के रूप में स्थापित किया जाय

इन सभी प्रक्रिया का ज्ञान न होने के कारण हम अपने सपनो को सही दिशा नही दे पाते है और फिर हम किसी जॉब के माध्यम से अपने जीवन की जरुरतो को पूरा करने लगते है जिससे salary के रूप में पैसे तो हम कमा लेते है लेकिन हमे इससे संतुष्टी नही मिल पाती है क्योंकि हमारे अंदर एक entrepreneur बनने की चाहत दबी होती है।

  • भारत में अपना बिज़नस किस प्रकार से स्थापित किया जा सकता है
  • सरकार के तरफ से क्या क्या सुविधा उपलब्ध है,
  • पूंजी की व्यवस्था किस प्रकार से की जा सकती है,
  • बिज़नस के लिए विभिन्न प्रकार के ऋण कैसे मिलते है
  • अपने बिज़नस को आप किस प्रकार से पंजीकृत करवा सकते है

और इसके सफल संचालन के लिए जरुरी अन्य बातो के साथ साथ टेक्स सम्बंधित सभी प्रकार की जानकारियां में यहाँ step by step आपके लिए बहुत ही साधारण भाषा में दे रहा हूँ जिससे आप आसानी से समझकर अपने सपनो को पूरा कर सकते है।

सबसे पहले आपको decision ये लेना है की आप किस प्रकार का बिज़नस करना चाहते है जो की मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग या सर्विस के रूप में हो सकता है।

  • मैन्युफैक्चरिंग: जब आप किसी प्रोडक्ट को बनाना चाहते है
  • ट्रेडिंग: जब आप किसी प्रोडक्ट में खरीद-बिक्री करना चाहते है
  • सर्विस: जबकि आप किसी प्रकार का सर्विस देकर पैसा कमाने चाहते है

जब आप यह तय कर चुके है कि आप अपना बिज़नस मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग या सर्विस में से किस क्षेत्र में जा सकते है तो फिर इसके बाद आपको प्रोडक्ट को फाइनल करना है जिसका आप व्यवसाय करने वाले है मतलब अगर आप निर्माण क्षेत्र में जाने का मन बना चुके है तो फिर आप किस प्रोडक्ट के लिए फैक्ट्री स्थापित करना चाह रहे हे, ट्रेडिंग में जाना है तो किन प्रोडक्ट्स में खरीद-बिक्री करना है और यदि सर्विस देना चाहते है तो किस प्रकार की सर्विस देने के लिए आप अपना बिज़नस स्थापित करेंगे इस बात का प्रोडक्ट्स के प्रति अपनी समझ और उससे सम्बंधित सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुवे यह तय कर ले की आप अपने बिज़नस में क्या sale करने वाले है।
अब आपको इस बात का निर्णय लेना है और समझना है की क्या आप अकेले ही अपने business को स्टार्ट करना चाहते है या आपको इसे स्टार्ट करने और सफलतापूर्वक चलाने के लिए और भी पार्टनर्स की जरुरत पड़ेगी.

  • यदि आप अकेले ही अपना business स्टार्ट करना और चलाना चाहते है तो आप sole proprietorship के रूप में अपने business स्टार्ट कर सकते है इसमे आपका बिज़नस और सभी जरूरी डॉक्यूमेंट आपके स्वयं के नाम से ही होते हे साथ ही यदि आप अपने business को बड़े आकार में करना चाहते है या सरकार के द्वारा दी जाने वाली कई तरह के लाभों का फायदा उठाना चाहते है तो आप इसे one Person Company के रूप में भी पंजीकृत करवा सकते है. जब आप अपने business को एक company के फॉर्म में चलाते हे तो ऐसी स्थिति में आपसे ज्यादा लोग जुड़ना चाहेंगे क्योंकि एक पंजीकृत कंपनी की स्थिति में आपपर लोग ज्यादा भरोसा कर सकते है अतः आपको ज्यादा recognition मिलता है
  • यदि आप ऐसा सोचते है की आप जो बिज़नस स्टार्ट करना चाहते है उसके लिए आपको कुछ और भी लोगो की जरूरत है जिनके साथ मिलकर आप इस बिज़नस को ज्यादा अच्छी तरह से चला सकते है क्योंकि मुख्य रूप से बिज़नस शुरू करने के लिए जरुरी पूंजी के अभाव में अन्य लोगो को जोड़ा जाता है साथ ही उस बिज़नस से सम्बंधित जानकारी, बनाये जाने वाले उत्पाद के विषय में तकनिकी जानकारियां और मार्केटिंग एवं अन्य जरूरी बातो की पर्याप्त ज्ञान के अभाव में कुछ ऐसे लोगो को साथ लेकर जिनसे आपसी सम्बद्ध अच्छे हो अपना बिज़नस शुरू किया जा सकता है।
    ऐसी स्थिति में आपके पास दो प्रकार के आप्शन है:-

1.Partnership: इसमे कुछ लोग साथ मिलकर आपसी सहमति से बिज़नस में सबों के द्वारा लगाया जाने वाला पूंजी और बिज़नस में होने वाले लाभ या हानि को आपस में किस तरह से बाँटना है इस बात को तय करके एक पार्टनरशिप डीड तैयार करवा सकते है जो की स्वयं या किसी वकील अथवा C.A की मदद से आसानी से बनाया जा सकता है, इसमे बिज़नस का पंजीकरण अनिवार्य नही होता जबकि जरूरी डाक्यूमेंट्स जैसे की पैनकार्ड, टिन वैट नम्बर इत्यादि पार्टनरशिप फर्म के नाम से आसानी से बन जाते है, जिसके बाद आप अपना बिज़नस साझेदारी फर्म के रूप में स्टार्ट कर सकते है, इसमे आपको इस बात का ध्यान रखना जरूरी है की बिज़नस में होने वाले नुकसान के कारण बाहरी लेनदारों के लिए ब्यक्तिगत रूप में आपका असीमित दायित्व माना जाता है जिसके कारण बिज़नस के लेनदारों को उनका पूरा भुगतान यदि पार्टनरशिप बिज़नस में आपकी हिस्सेदारी से नही हो पाता हे तो ऐसी स्थिति में आपकी ब्यक्तिगत संपत्ति को भी बेचकर उनका भुगतान किया जा सकता है जैसा की sole proprietorship में भी होता है। यदि आप अपने दायित्व को असीमित न रखकर ब्यापारिक संपत्ति तक ही सिमित रखना चाहते हे तो इसके लिए आपके पास Limited liability partnership का विकल्प है जिसके माध्यम से आप अपने ब्यक्तिगत संपत्ति को ब्यापारिक हानि से सुरक्षित रख सकते है।
2.Company: यदि आप अपने बिज़नस को बड़े पैमाने पर करना चाहते है, सरकारी सुविधाओ का बेहतर लाभ लेना चाहते हे, मार्केट में ज्यादा रिकग्निशन के साथ यदि आप चाहते है की अन्य दूसरी और बड़ी कंपनियां भी आपके साथ ब्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करे तो आप Company Act के तहत अपने ब्यापार को कंपनी के रूप में रजिस्टर करवाकर अपना बिज़नस स्टार्ट करे। जबकि आप कंपनी के रूप में बिज़नस को पंजीकृत करवाना चाहते है तो आपके पास Pvt Ltd Co या Public Ltd Co का विकल्प होता है, जबकि कुछ लोग मिलकर ही कंपनी चलाना चाहते है तो Pvt Ltd Co और यदि आप अधिक से अधिक लोगो को शेयरहोल्डर के रूप में जोड़ना चाहते हे तो फिर आपको Public Ltd Co के रूप में अपने बिज़नस को पंजीकृत करवाना चाहिए।
कंपनी पंजीकरण की प्रक्रिया कंपनी अधिनियम के तहत होती हे जिसके लिए आप किसी C.A से मिलकर इन प्रक्रियाओ को आसानी से पूरा करवा सकते है, जिसके लिए वो आपसे अपनी सामान्य फीस लेगा।

पंजीकरण(रजिस्ट्रेशन) के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारिया:- जबकि आप कोई भी बिज़नस स्टार्ट करने का निर्णय ले चुके है तो इसके लिए आपको जरूरी रजिस्ट्रेशन करवाना होता है जिसमे मुख्य रूप से  निम्नलिखित है:-

  • पैन नम्बर : पैन नम्बर किसी भी बिज़नस का सबसे जरूरी डोक्युमेंट में से एक होता है जो की आयकर से सम्बंधित है।
  • टैन नम्बर : आयकर कानून के तहत जब आप कुछ निश्चित तरह के पेमेंट करते है तो उनपर TDS काटकर सरकार के पास टैन नम्बर के माध्यम से जमा किया जाता है।
  • बैंक खाता: बिज़नस के नाम से आपका बैंक खाता भी होना जरूरी है जिसके माध्यम से पैसो का लेन देन होता है।
  • GST नम्बर : जो की अधिनियम के तहत अपने उत्पाद के बिक्रय के लिए जरूरी होता है।
  • Shop & establishment: किसी भी तरह के ब्यापारिक establishment के लिए shop & establishment का पंजीकरण अनिवार्य होता है।
  • फैक्ट्री एक्ट: यदि आप मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस के लिए फैक्ट्री लगाना चाहते है तो आपको फैक्ट्री एक्ट के तहत इसका पंजीकरण करवाना होता है।
  • Providend Fund: यदि आपके बिज़नस में 20 या इससे ज्यादा कर्मचारी है तो आपको providend fund का पंजीकरण अनिवार्य होता है।
  • SME रजिस्ट्रेशन : यदि आपका ब्यापार SME इंडस्ट्रीज के अंतर्गत आता है तो SME का रजिस्ट्रेशन जरुर करवाए, जिससे आप सरकार की तरफ से इस इंडस्ट्रीज को मिलने वाले फायदों का लाभ उठा सके.