How to Prepare Detail Project Report For Business Loan( बिज़नेस लोन के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट कैसे बनाये)

Project report

यदि आप कोई भी बिज़नेस स्टार्ट करना चाहते है चाहे वो एक लाख का हो या 100 करोड़ का हो

चाहे आप

ट्रेडिंग- मतलब वस्तुवो को सिर्फ खरीदकर बेचना चाहते हो

सर्विस- मतलब दुसरो को किसी तरह सुविधा या जानकारी देना देना चाहते हो

मैन्युफैक्चरिंग- मतलब किसी प्रोडक्ट को बनाना चाहते हो

एग्रीकल्चरल & फार्मिंग- किसी तरह का फसल (चावल/दाल/मसाला/सब्जी/फल/फूल या फिर किसी तरह के पेड़ लगाना इत्यादि) लगाना या फिर पशुपालन( जैसे गाय-भेस/ बकरी / मुर्गी / मछली / खरगोस / भेड़ इत्यादि) का काम करना चाहते हो

स्टार्टअप- किसी नए innovative idea (जैसे-OLA/UBER/OLX/FACEBOOK/YOUTUBE/TWITTER ) के आधार पर कोई बिज़नेस प्लान करना कर रहे हो

तो आपको अपने बिज़नेस को स्टार्ट करने और उसे आगे बढाने के लिए पैसो की जरुरत है, और जब भी आप अपने बिज़नेस को फाइनेंस करने के लिए किसी भी बैंक के पास जायेंगे तो वो सबसे पहले आपका बिज़नेस प्लान का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट आपसे मांगेगा, आप सरकार की किसी भी स्कीम में loan लेना चाहे आपको इसके लिए सबसे पहले प्रोजेक्ट रिपोर्ट की आवश्यकता होती है क्योंकि प्रोजेक्ट रिपोर्ट एक ऐसा रिपोर्ट होता है जिसमे हर वो इनफार्मेशन होता है जो बैंक आपको loan देने से पहले जानना चाहता है, और आपके प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर ही बैंक आपको loan देने या ना देने का फैसला लेता है.

प्रोजेक्ट रिपोर्ट आपको डिफाइन करता है, आपके business idea को डिफाइन करता है और इस idea के आधार पर फ्यूचर प्रोजेक्शन को भी डिफाइन करता है, दुसरो में और आपमें क्या अंतर है इस बात को बताता है

इसलिए ये जरुरी है की आप सबसे पहले अपने बिज़नेस प्लान का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाए, अब आपके लिए ये जानना जरुरी है की आखिर प्रोजेक्ट रिपोर्ट को कैसे बनाया जा सकता है और इसमें क्या क्या इनफार्मेशन देना है.

तो आइये step by step यहाँ समझते है…..

  1. Executive Summary & Promoter’s Background : सबसे पहले आप बिज़नेस को स्टार्ट करने वाले मतलब आपके बारे में बताइए, अगर पार्टनरशिप या कंपनी के फॉर्म में स्टार्ट करना चाहते है तो जितने भी पार्टनर और डायरेक्टर है उनका डिटेल्स और बैकग्राउंड जैसे उनका नाम, पता, अनुभव, क्वालिफिकेशन येसब कुछ बताइये
  2. Project Background : उसके बाद फिर आप अपने बिज़नेस के बारे में बताइये की आप क्या बिज़नेस करना चाहते है, इस तरह के और कौन कौन से बिज़नेस चल रहे है आपका idea उन सबसे बेहतर क्यों है और इतनी कॉम्पिटीशन के बावजूद भी आपका आप कैसे अपने IDEA में सफल हो सकते है.
  3. Land /Shed Details & Logistics : इसके बाद आप यह बताइये की आप जो बिज़नेस setup करना चाहते है उसमे जमीन या फिर बिल्डिंग का स्पेस होगा वो किस किस काम के लिए और कुल कितना जरुरी है, और इसका location कहाँ होगा, अगर आपने पहले से जगह ली हुई है तो उसके बारे में भी बताये और साथ ही ये भी बताने का कोशिश करे की आपका बिज़नेस का location है वो कैसे आपके लिए फायदेमंद है, अगर आप कोई फैक्ट्री लगा रहे है तो फिर इसके साथ Building Construction Plan भी बताइये की आपका कंस्ट्रक्शन प्लान क्या है.
  4. Procurement Strategy of Raw Material /Stock : यहाँ आपको यह बताना जरुरी है की Raw Material /Stock के supplier कौन कौन है और आसानी से ये उपलब्ध है या नहीं, सामान्यतः आप किनसे इन्हें खरीद सकते है और इसकी लागत क्या होगी और आपको कितने दिनों के स्टॉक की आवश्यकता होगी इत्यादि जो भी जानकारी आप दे सकते है उतना देने की कोशिश करे.
  5. Techno-Commercial Viability Assessment : वर्तमान युग Technology का है मतलब यदि आप पुराने तकनीक पर आधारित ब्यापार करेंगे तो आपका लागत ज्यादा होगा और आप मार्केट से बाहर हो जायेंगे, इसलिए यहाँ ये बताना जरुरी है की कैसे आपके द्वारा प्रयोग किया जाने वाला टेक्नोलॉजी है वह commercially है, और निकट भविष्य में टेक्नोलॉजी में आने वाले बदलाव से इसपर ज्यादा रिस्क नहीं है इत्यादि.
  6. Capacity & Production: यहाँ आप इस बात को बताए की आप जो बिज़नस सेटअप करने जा रहे है उसका प्रोडक्शन कैपेसिटी कितना है और आप वास्तव में कितना प्रोडक्शन होने का अनुमान लगा रहे है, इस बात को सही आंकलन के आधार पर बताये, क्योंकि जितना आपका प्रोडक्शन होगा उसी पर आपका पूरा फाइनेंसियल एनालिसिस होगा जैसे की टर्नओवर और प्रॉफिट जो की सीधे आपके प्रोडक्शन से लिंक है। यदि आपको इसकी जानकारी नहीं है तो जिनसे आप मशीन खरीदेंगे उनसे इसके बारे में जानकारी ले लीजिए।
  7. Pollution Control: किसी भी तरह का Pollution फिर चाहे वो water/Air/ ध्वनि Pollution हो आपको ये बताना है कि आपके यूनिट से ऐसा कोई pollution होता है कि नहीं और अगर होता है तो उसको कन्ट्रोल करने के लिए आप कौन कौन से pullution control equipment लगाएंगे, साथ ही अपने राज्य के pollution control board से भी आपको अपने यूनिट लगाने के लिए NOC लेना है, और ऐसा NOC आपको मिल गया है या अभी प्रोसेस में है इस बात को भी बताए।

प्रोजेक्ट रिपोर्ट का कोई दायरा नहीं होता, ना ही इसका कोई specific फॉर्मेट होता है, बस आपको ये कोशिश करना है कि आप बिज़नस से सम्बंधित जितना डिटेल इनफार्मेशन दे सकते है उतना दे जिससे की इसे पढ़ने वाले को आपके बिज़नस प्लान को समझकर ये निर्णय लेने में आसानी हो की आपका बिज़नस सफल हो सकता है अथवा नहीं।

  1. Mode of Waste Disposal : आपके यूनिट से निकलने वाले wastage का निपटारा आप कैसे करेंगे इस बात को यहाँ आप बताइए, अगर संभव हो तो waste recycling के छोटे मशीन को लगाकर इसका निबटारा करे।
  2. Manufacturing Process Flow diagram:आप जो भी प्रोडक्ट बनाने वाले है वह कैसे बनता है, और उसका step-by-step प्रोसेस क्या है और हर स्टेप में लगने वाला समय और लागत की पूरी जानकारी यहाँ देने की कोशिश करे।
    आप मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस का एक डायग्राम भी दे जिससे पढ़ने वाला ज्यादा बेहतर ढंग से इसे समझ सके।
    आप अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट को जितना ट्रांसपेरेंट रखेंगे सामनेवाले को आपके प्रोजेक्ट की सफलता पर उतना ही ज्यादा यक़ीन होगा।
  3. Infrastructure Source: आपको पानी और बिजली की कितनी आवश्यकता होगी और इसका प्रबंध आप कैसे करेंगे ये यहाँ बताइये, मुख्यतः राज्य सरकार के सम्बंधित विभाग में आपको पानी और बिजली के कनेक्शन के लिए आवेदन देना होता है।
  4. Marketing Strategy: किसी प्रोडक्ट को बना लेना आसान है मुश्किल है तो उसे सेल करना, और इसके लिए आपको एक सही मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनानी जरूरी है जो की आपके इंडस्ट्रीज़,प्रोडक्ट,लागत, उत्पादन, बाजार डिमांड, और लोकेशन के आधार पर बनाई जा सकती है। अच्छी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी आपको अपने बिज़नस में सफल होने के लिए बहुत जरुरी है, बाजार में उपलब्ध कॉम्पिटिशन के बीच आप जितना प्रोडक्शन करेंगे उसे कैसे मार्केट में सेल करेंगे इस बात को सही तरीके से यहाँ समझाए।
  5. Implementation schedule: यहाँ आपको यह बताना है कि आपके प्लान के मुताबिक अपने यूनिट को लगाने में अलग अलग जरुरी स्टेप में कितना वक़्त लगेगा, और ओवरआल कितने वक़्त में आपका यूनिट स्टार्ट हो जाएगा। जैसे बैंक लोन, ज़मीन, सिविल कंस्ट्रक्शन, मशीन लगाने और जरुरी रजिस्ट्रेशन और NOC लेने में आपको कितना वक़्त लगेगा।
  6. SWOT analysis: यहाँ आपको अपने और अपने बिज़नस से सम्बंधित

S-Strength:     Service, Product quality, Ideas

W-Weakness: Marketing, Skilled staff, Funding

O-Opportunities: Govt Policy, Competitions, Expending Market,

T- Threats  : Technology, Competitions, Large Manufacturer

Assumptions : कुछ Assumptions जो आपके अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट में देनी जरुरी है 

  • यूनिट प्रतिदिन कितना घंटा या कितना शिफ्ट में चलाया जाएगा
  • 1st year, 2nd year और इसके बाद आने वाले हर शालो में अनुमानित उत्पादन कूल उत्पादकता का कितना होगा
  • पूंजीगत व्यय एवं कार्यशील पूंजी में ब्याज की दर क्या मानकर प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनायीं गयी है
  • प्रोजेक्ट रिपोर्ट में आपके और बैंक loan का ratio क्या होगा
  • बैंक loan को कितने वर्षो में वापस किया जायेगा
  • यूनिट में पॉवर का पैर यूनिट कास्ट क्या आएगा, जैसे बिजली का रेट पर यूनिट और genset में diesal का खर्च क्या आएगा
  • selling & distribution में कुल विक्रय का कितना प्रतिशत खर्च किया जायेगा
  • repair and maintanance में कुल लागत का क्या प्रतिशत खर्च माना गया है

Attachments: आपको अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ कुछ documents भी attach करना है 

  • Land Detail
  • SME Registration (Udyog-adhaar)
  • Shop & Establishment Registration
  • Pollution NOC (Application status)
  • Details of Power Connection (Application status)
  • CIBIL score
  • Project Report
  • Proof of Equity contribution
  • Income Tax Return
  • Machine Quotation
  • Raw Material Quotation
  • Civil Construction cost estimate
  • PAN No
  • ID/Address Proof
  • Caste certificate
  • Educational & experience certificate
  • Guarantor (exempt under CGTMSE Scheme)
  • Collaterals Security (FD/Gold/Insurance/Property etc)exempt under CGTMSE Scheme
  • Guarantor (exempt under CGTMSE Scheme) Collaterals Security (FD/Gold/Insurance etc)

List of Annexure for Financial Analysis: आपको अपने प्रोजेक्ट का वित्तीय विश्लेषण करना और उसका Annexures को प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ लगाना है.

Summery Report Annexure-I
Land & Building Annexure-II
Plant & Machinary Annexure-III
Preliaminiary Expenditure Annexure-IV
Utilities Requirenment Annexure-V
Manpower Requirenment Annexure-VI
Consumble Store Annexure-VII
Repair and Maintanance Annexure-VIII
Projected Revenue details Annexure-IX
Project Cost and Source of Finance Annexure-X
Bank Loan repaymnet schedule Annexure-XI
Depreciation schedule Annexure-XII
Profitability Estimate Annexure-XIII
Projected Balance Sheet Annexure-XIV
Cash Flow Statement Annexure-XV
Break Even Analysis Annexure-XVI
Pay Back Period Annexure-XVII
Internal Rate of Return Annexure-XVIII

जब भी हम business loan के लिए बैंक को approach करेंगे तो हमे अपने business project को बैंक से फाइनेंस करवाने में दो प्रॉब्लम आएँगी.

  1. मार्जिन मनी- बैंक के नियमो के आधार पर यदि हम बैंक से business loan ले रहे है तो इसके लिए ये जरुरी है की business स्टार्ट करने वाले का भी उस business में अपना पैसा लगाया जा रहा हो, जो की कम से कम प्रोजेक्ट कास्ट का 25% होना चाहिए तब बैंक 75% loan देने के लिए तैयार होगा, जैसे आपका प्रोजेक्ट कास्ट 1 करोड़ का है तो आपको मार्जिन मनी के रूप में 25 लाख रुपया अपना लगाना होगा जिसे मार्जिन मनी बोला जाता है तब बैंक आपको 75 लाख का loan देने के लिए तैयार हो सकता है , अगर business स्टार्ट करने वाले के पास मार्जिन money नहीं है तो ऐसी स्थिति में बैंक आपके प्रोजेक्ट को फाइनेंस नहीं करेगा.
  2. बैंक जब प्रोजेक्ट कास्ट का 75% फाइनेंस करेगा तब इसके लिए आपसे collateral security देने को बोला जायेगा, जिसमे आपको जमीन,मकान,शेयर,ज्वेलरी, फिक्स्ड डिपाजिट,इन्सुरेन्स इत्यादि का पेपर बैंक के पास गिरवी रखना होता है, साथ ही साथ किसी ऐसे ब्यक्ति को आपके द्वारा लिए जाने वाले loan के लिए guarantor भी बनाना पड़ता है जिसकी guarantee पर बैंक ये भरोसा कर सके की यदि आप loan का repayment करने में डिफ़ॉल्ट करते है तो ऐसा ब्यक्ति आपके loan को चुकाने की क्षमता रखता है.

अब यदि देखा जाय जब आप कोई नया business setup करने जा रहे है तो ज्यादातर लोगो के पास अपने business प्रोजेक्ट को बैंक से फाइनेंस करवाने के लिए ना तो अपने हिस्से का मार्जिन मनी होता है और न ही जरुरी collateral security और guarantor होता है, और इन दोनों के अभाव में न तो बैंक आपको business loan देगा न ही आपका business setup करने का सपना पूरा होगा.

इस समस्या से निकलने और अपने business idea को मूर्त रूप में लाने के लिए हमे क्या करना है, इस बात को अच्छे से समझ लीजिये..

मार्जिन मनी जो की प्रोजेक्ट कास्ट का 25% लगाना होता है, जो यदि आपके पास नहीं है तो कुछ विशेष स्थिति में बैंक मार्जिन मनी को भी फाइनेंस करता है, जैसे:-

  • आपके पास कोई higher qualification है ( MBA,Engineering etc )
  • जब आपने अपने प्रोजेक्ट में काफी रिसर्च की है और अब आपको उसका काफी knowledge है
  • जब आप कोई नया innovative idea के तहत business स्टार्ट कर रहे है
  • यदि आपके पास ऐसा higher digree या knowledge नहीं है तो भी आप मार्जिन मनी के लिए SIDBI के किसी भी ब्रांच में जाकर मिल सकते है, SIDBI नए entrepreneurs को मार्जिन मनी के लिए loan देती है जिसे Risk Capital या Seed Capital बोला जाता है. इसके लिए SIDBI ने India Aspiration Fund और SMILE (SIDBI Make In India Loan for Small Enterprise) जैसी स्कीम चला रही है जिसमे नए enterpreneurs को मार्जिन मनी के लिए support किया जाता है.
  • मार्केट में कई venture capitalist Firm भी है जो नए business को setup करने और चलाने में अपना पैसा लगाती है, आप अपने प्रोजेक्ट के लिए ऐसे venture capitalist Firm से भी संपर्क कर सकते है.
  • यदि सभी कोशिशो के बाद भी आपको बैंक से मार्जिन मनी के लिए loan नहीं मिल पा रहा है तो फिर, आपके पास जितना पैसा है और आप अपने family / friends से अपने business के लिए जितना पैसा जुटा पाते है उतने ही पैसो को मार्जिन मनी का 25% हिस्सा मानते हुवे 75% बैंक loan के लिए apply करे, मतलब यदि आपके पास 10 लाख रुपया ही है तो फिर आप 1 करोड़ की जगह maximum 40 लाख तक का ही business project तैयार करे जिससे की 30 लाख का loan आपको बैंक से आसानी से मिल जायेगा, फिर धीरे धीरे अपने business को बड़ा करे.
  • यदि आपका प्रोजेक्ट कास्ट 25 लाख या इससे कम का है तो फिर PMEGP (Prime Minister Employment Generation Programme) में भी आप loan ले सकते है, इसमें अच्छी बातये है की इसमें आपको मार्जिन मनी सिर्फ 5-10% ही लगाना होता है और प्रोजेक्ट कास्ट का 90% तक आपको loan मिल सकता है, साथ ही इस स्कीम में 15-35 % तक का subsidy भी दिया जाता है जो की आपको अपने business को लगाने और उसे सफलता पूर्वक चलाने के लिए प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है. और आपका प्रोजेक्ट कास्ट 25 लाख से ज्यादा है तो फिर अन्य लोगो को पार्टनर के रूप जोड़कर भी आप PMEGP में अपने प्रोजेक्ट को फाइनेंस करवा सकते है.

दूसरी जो समस्या है collateral security और guarantor का तो इसके लिए भारत सरकार का एक स्कीम है CGTMSE (Credit Guarantee Fund Trust For Micro and Small Enterprises) जिसमे यदि आपका प्रोजेक्ट हर तरह से अच्छा है तो फिर 2 करोड़ तक का loan आप बिना किसी collateral security और guarantor के ले सकते है, इसके लिए आप बैंक से अपने loan को CGTMSE के तहत करने को बोल सकते है, ये स्कीम बहोत ही अच्छी स्कीम है जो की आपको collateral security और guarantor के बिना भी business loan दिला सकती है.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.